बेंगलुरु: बेलगावी में वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) के दौरान 198 मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की कोशिश के आरोप में दर्ज FIR के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता रवि पाटील और उनके दो समर्थकों के खिलाफ फिलहाल कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं करने का पुलिस को निर्देश दिया है।
बेलगावी के मार्केट पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR और उसके बाद की कानूनी कार्रवाई को रद्द करने की मांग को लेकर बीजेपी नेता रवि बसलिंगप्पागौड़ा पाटील तथा उनके समर्थकों शंकर बीरप्पा नायक और प्रशांत मुंडिमानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
गुरुवार को धारवाड़ पीठ में जस्टिस वेंकटेश नायक की एकल पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता मीरासाब सानदी, जो कांग्रेस कार्यकर्ता हैं, को नोटिस जारी किया।
अदालत ने राज्य सरकार को हालिया जांच रिपोर्ट के साथ अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं करने का निर्देश पुलिस और जांच अधिकारी को दिया।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर तक स्थगित कर दी।
इससे पहले मिल चुकी है अग्रिम जमानत
इसी मामले में बेलगावी सेशन कोर्ट ने 3 अक्टूबर को रवि बसलिंगप्पागौड़ा पाटील को अग्रिम जमानत मंजूर की थी।
क्या है आरोप?
FIR में आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ताओं समेत करीब 20 से 25 लोगों ने मुस्लिम समुदाय के वोटरों को निशाना बनाने के लिए कथित तौर पर साजिश रची थी। आरोप के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान 198 मुस्लिम वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश की गई।
इस मामले में रवि पाटील और उनके समर्थकों के खिलाफ बेलगावी के मार्केट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट का यह निर्देश फिलहाल जबरन कार्रवाई पर रोक से संबंधित है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

