हत्तरगी, बेलगावी: गन्ने के उचित दाम और किसानों की मांगों को लेकर जारी आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। पिछले 28 घंटों से पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर जारी रास्ता रोको आंदोलन आखिरकार खत्म कर दिया गया है। किसानों ने हाईवे पर अपना धरना समाप्त करते हुए अब केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के हुबली स्थित आवास तक पैदल मार्च निकालने का फैसला किया है।
किसानों ने कल सुबह 10 बजे से हत्तरगी इलाके में पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे को जाम कर रखा था। गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी और किसानों को उनकी फसल का उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर बड़ी तादाद में किसान और किसान संगठनों के नेता इस आंदोलन में शामिल हुए थे। लगातार 28 घंटे तक चले इस आंदोलन के कारण हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा।
हाईवे जाम खत्म, अब हुबली की तरफ कूच!
करीब 28 घंटे के लंबे आंदोलन के बाद किसान नेताओं ने हाईवे जाम खत्म करने का ऐलान किया। इसके बाद किसानों ने सड़क से हटकर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के हुबली स्थित आवास की तरफ पैदल मार्च निकालने का फैसला किया है। किसानों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अब आंदोलन को नए तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
आंदोलनकारियों के सड़क से हटने के बाद पुणे-बेंगलुरु नेशनल हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे बहाल होने लगा। ऐसे में वाहन चालकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
काकती से बेळगाव और हिरेबागेवाड़ी होते हुए हुबली पहुंचेंगे किसान
किसानों के तय कार्यक्रम के मुताबिक, आंदोलनकारी आज रात काकती में मुकाम करेंगे। इसके बाद बेळगाव होते हुए हिरेबागेवाड़ी पहुंचेंगे और वहां से हुबली की तरफ अपना पैदल मार्च जारी रखेंगे। किसानों ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास तक पहुंचकर अपनी मांगों को सामने रखने और घेराव करने का इरादा जाहिर किया है।
MSP बढ़ाने की मांग पर किसानों का जोर
इस आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी उपज का उचित दाम देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी की मांग भी उठाई। गन्ना उत्पादक किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी मेहनत के मुताबिक उचित कीमत मिलनी चाहिए और उनकी समस्याओं पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
फिलहाल, 28 घंटे बाद हाईवे पर रास्ता रोको आंदोलन खत्म हो गया है, लेकिन किसानों का संघर्ष अभी जारी है। अब सभी की निगाहें हुबली की तरफ निकलने वाले इस पैदल मार्च और किसानों की मांगों पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

