वोट चोरी बंद करो, लोकतंत्र बचाओ
दिल्ली की ऐतिहासिक रैली में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का भाजपा पर गंभीर आरोप

वोटों की कथित चोरी और चुनावी प्रणाली में अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली में आयोजित विशाल विरोध रैली को संबोधित करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि आज देश के नागरिक केवल कांग्रेस कार्यकर्ता या मात्र मतदाता बनकर नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के रक्षक बनकर एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह जनसभा संविधान द्वारा प्रदत्त सबसे पवित्र अधिकार—मताधिकार—की रक्षा के लिए है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वोट की शक्ति ही लोकतंत्र की नींव है। इसी शक्ति के माध्यम से एक किसान अपने बच्चों के भविष्य का निर्णय करता है, एक मजदूर अपनी गरिमा और सम्मान की रक्षा करता है, एक युवा अपने सपनों को अभिव्यक्त करता है और एक राष्ट्र अपनी सामूहिक आकांक्षाओं की घोषणा करता है। लेकिन दुर्भाग्य से आज इसी पवित्र शक्ति को विभिन्न तरीकों से चुराया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार मतदाता सूचियों की विशेष पुनरीक्षण जैसी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर योजनाबद्ध तरीके से “वोट चोरी” कर रही है। उनके अनुसार यह चोरी एक-दो बार नहीं, बल्कि बार-बार की जा रही है, जिसके खिलाफ देश की जनता स्पष्ट शब्दों में कह रही है कि अब बहुत हो चुका—वोट चोरी बंद करो और लोकतंत्र बचाओ।

सिद्धारमैया ने कहा कि इतिहास गवाह है कि तानाशाही की शुरुआत सड़कों पर बंदूकों से नहीं होती, बल्कि संस्थाओं पर शांत कब्जे, व्यवस्था के क्रमिक क्षरण और अंततः चुनावों की चोरी से होती है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में सत्तावादी सरकारें लोकतंत्र की रक्षा का दिखावा करते हुए वास्तव में चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करती हैं, और आज भारत में भाजपा भी उसी रास्ते पर चल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संस्थाओं को अपने नियंत्रण में ले रही है, चुनावी मशीनरी पर दबाव बना रही है, मतदाता सूचियों से छेड़छाड़ कर रही है, विपक्ष के मजबूत क्षेत्रों में मतदान को दबाया जा रहा है और धन व शक्ति के माध्यम से समान अवसर के सिद्धांत को कुचला जा रहा है। उनके अनुसार यह केवल कुप्रबंधन नहीं, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक अवधारणा पर सीधा हमला है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि चोरी किए गए वोटों से बनी सरकार लोकतांत्रिक सरकार नहीं हो सकती। ऐसी सरकार जनता से डरती है, जनादेश को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करती है और धोखे के सहारे सत्ता में रहती है। उनके अनुसार आज़ादी के बाद भाजपा की वोट चोरी भारतीय गणराज्य के सामने सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।

इस अवसर पर उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे नाजुक समय में वही एकमात्र नेता हैं जो असाधारण साहस के साथ खड़े हुए हैं। सिद्धारमैया के अनुसार राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों में अनियमितताओं, बूथ स्तर पर हेरफेर और संगठित वोट चोरी को सबूतों के साथ उजागर किया है।

उन्होंने बताया कि महादेवपुरा से आलंद तक, हरियाणा से बिहार तक, राहुल गांधी ने विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में यह दिखाया कि किस प्रकार विशेष रूप से कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के मजबूत इलाकों में वोटों को दबाया गया, स्थानांतरित किया गया या कमजोर किया गया। कर्नाटक के महादेवपुरा और आलंद विधानसभा क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां वोट चोरी केवल आरोप नहीं, बल्कि एक जीवंत सच्चाई है।

उनके अनुसार महादेवपुरा में हजारों फर्जी या संदिग्ध मतदाता पंजीकरण और चुनावी सूचियों में विसंगतियां पाई गईं, जिनका भाजपा की मामूली बढ़त से सीधा संबंध दिखाई देता है। इसी तरह आलंद में 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले लगभग 6,018 वैध मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया गया, जिसके परिणामस्वरूप एफआईआर दर्ज हुई और विशेष जांच टीम गठित की गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल ही में एसआईटी ने चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें एक पूर्व भाजपा विधायक और उनके बेटे सहित सात लोगों पर लगभग छह हजार मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। उन्होंने इसे वोट चोरी के खिलाफ संघर्ष में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति बताया।

सिद्धारमैया ने कहा कि इस पूरी लड़ाई ने राहुल गांधी को इस गणराज्य का नैतिक विवेक और वोट चोरी के खिलाफ संघर्ष का ध्वजवाहक सिद्ध कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन संवैधानिक नैतिकता, अंबेडकर के विचारों और इस मूल सिद्धांत पर आधारित है कि संप्रभुता जनता का अधिकार है, न कि किसी पार्टी या उन तत्वों का जो चुनाव चुराना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि आज राहुल गांधी के नेतृत्व में करोड़ों भारतीयों ने इस संकल्प पर हस्ताक्षर किए हैं कि वे अपने लोकतंत्र को चोरी नहीं होने देंगे। उनके अनुसार यह मुद्दा केवल तकनीकी या वैचारिक नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए व्यक्तिगत और भावनात्मक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब एक युवा महिला घंटों कतार में खड़े रहने के बाद यह जानती है कि उसका वोट हटाया जा चुका है, तो वह स्वयं को ठगा हुआ महसूस करती है। जब एक बुजुर्ग किसान सुबह-सवेरे मतदान केंद्र पहुंचता है और अपना नाम सूची में नहीं पाता, तो उसे धोखे का एहसास होता है। जब दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और गरीब—जो सबसे अधिक अपने वोट पर निर्भर करते हैं—अपनी आवाज को विकृत होते देखते हैं, तो यह सामाजिक न्याय पर हमला बन जाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वोट चोरी केवल आंकड़ों का मामला नहीं, बल्कि गरिमा, समानता और भारतीय गणराज्य की आत्मा का प्रश्न है। दिल्ली की इस ऐतिहासिक रैली से उन्होंने हर भारतीय से अपील की कि वह अपने वोट, अपने लोकतंत्र और अपने भविष्य की रक्षा करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आंदोलन केवल चुनावों या किसी एक पार्टी से बड़ा है; यह उस गणराज्य को बचाने की लड़ाई है, जिसके लिए पीढ़ियों ने बलिदान दिए हैं। उन्होंने पारदर्शी मतदाता सूचियों, चुनावी संस्थाओं की जवाबदेही, स्वतंत्र संस्थानों, विश्वसनीय मतदान प्रणाली और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित राजनीतिक संस्कृति सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने घोषणा की कि वोट चोरी के रास्ते फासीवाद को भारत में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा, और करोड़ों लोगों के हस्ताक्षर एक ऐसा नैतिक जनादेश हैं जो किसी भी चोरी किए गए चुनाव से अधिक शक्तिशाली हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि इतिहास में यह दर्ज होना चाहिए कि जब वोट चोरी ने भारत को खतरे में डाला, तब जनता एकजुट हुई—और जनता ही विजयी हुई।

Source: Haqeeqat Time (Translate in Hindi)