लगावी सीमा विवाद को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने बेंगलुरु में कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “आप किसी का भी समर्थन कीजिए, लेकिन आपके प्रोत्साहन से हमें किसी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए। हमारी भाषा और हमारे राज्य के मामले में अगर दखल दिया गया तो हम खामोश बैठने वालों में से नहीं हैं। बोलने से पहले सोच-समझकर बोलिए।”

प्रियांक खरगे ने कहा, “आपको अपने राज्य से जितना प्यार है, उससे कहीं ज़्यादा हमें अपने कर्नाटक और अपने कन्नड़िगा भाइयों से मोहब्बत है। कानून-व्यवस्था का सम्मान करते हुए बात कीजिए। केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट मौजूद हैं, अगर कोई विवाद है तो कानूनी रास्ता अपनाइए। मन में जो आए वह कहना ठीक नहीं है।”

इसी दौरान आरएसएस की बेलगावी बैठक और राम मंदिर दान राशि में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर भी उन्होंने निशाना साधा। उन्होंने कहा, “आरएसएस चाहे बेलगावी में बैठक करे, लेकिन पहले राम मंदिर दान राशि के मामले में पूरी पारदर्शिता लाए। हर चीज़ का श्रेय लेने वाले लोग अब इस मामले में भी जवाब दें। चंपत राय और संबंधित ट्रस्ट बताए कि कथित लूट में किसकी कितनी भूमिका रही और श्रद्धालुओं को हुए नुकसान का जवाब कौन देगा।”

खरगे ने सवाल उठाते हुए कहा, “अगर दान का कोई रजिस्टर ही नहीं है तो दक्षिणा कैसे ली गई? किसने कितना चंदा लिया, इसका पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए। केवल किसी चैनल पर बयान देने या सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से जवाबदेही पूरी नहीं होती।”

एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि “कमियों को दूर कर एसआईआर को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। बीजेपी नेताओं ने चुनाव आयोग में शिकायत की है, लेकिन दूसरी तरफ मनमर्जी से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। पासपोर्ट, यात्रा दस्तावेज़ और आधार जैसे सभी दस्तावेज़ देने के बावजूद उन्हें स्वीकार नहीं किया जा रहा। क्या यही सरकार चलाने का तरीका है?”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि “बीजेपी और जेडीएस अपने नेतृत्व को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। क्रॉस वोटिंग ने बीजेपी को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है।”