कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला
बाइक टैक्सी पर लगी पाबंदी हटी, सरकार को परमिट जारी करने का निर्देश
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बाइक टैक्सी सेवाओं पर लगाई गई पाबंदी को रद्द करते हुए राज्य सरकार को बाइक टैक्सियों के लिए परमिट जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स, व्यक्तिगत बाइक टैक्सी मालिकों और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार कर लिया है।
मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति सी. एम. जोशी की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मोटरसाइकिलों को परिवहन वाहन के रूप में पंजीकृत किया जाए और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट जारी किए जाएं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि संबंधित परिवहन प्राधिकरणों को वाहन पंजीकरण और परमिट जारी करने से जुड़े कानूनी पहलुओं की जांच करने का अधिकार है, लेकिन केवल इस आधार पर पंजीकरण या परमिट से इनकार नहीं किया जा सकता कि मोटरसाइकिलों को परिवहन या कॉन्ट्रैक्ट कैरिज वाहन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण कानून के अनुसार परमिट के साथ आवश्यक शर्तें लगा सकता है।
ये अपीलें उबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, रूपन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और एएनआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर की गई थीं। इन अपीलों में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि जब तक सरकार मोटर व्हीकल एक्ट और नियमों की धारा 93 के तहत दिशानिर्देश जारी नहीं करती, तब तक बाइक टैक्सी सेवाओं की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद राज्य में एक बार फिर बाइक टैक्सी सेवाओं का रास्ता साफ हो गया है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने और शहरी परिवहन व्यवस्था को सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।







