गृह मंत्रालय के 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2025 तक ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(ख) के तहत 1,11,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक किया गया है.

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय अब इंटरनेट से समाचार, विश्लेषण, कॉमेडी, व्यंग्य या टिप्पणी (जिसे आम तौर पर ‘कंटेंट’ कहा जाता है) को सीधे हटवा सकता है. सेंसर करने की शक्ति हासिल करने के एक वर्ष बाद द हिंदू ने मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि औसतन हर दिन 290 सामग्री हटाने के आदेश जारी किए जाते हैं.

अखबार के अनुसार, गृह मंत्रालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट, जो बुधवार (25 मार्च 2026) को प्रकाशित हुई, बताती है कि 31 मार्च 2025 तक ‘सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(ख) के तहत 1,11,185 संदिग्ध ऑनलाइन कंटेंट को ब्लॉक किया गया है.

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(1) का उद्देश्य ऑनलाइन पोर्टल और सोशल मीडिया मध्यस्थों (तकनीकी कंपनियां जैसे एक्स, मेटा और यूट्यूब) को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कानूनी दायित्व से बचाना है. लेकिन आईटी कानून की धारा 79(3)(ख) यह कहती है कि, यदि सरकारी प्राधिकरण द्वारा चिह्नित किए जाने के बावजूद वे सामग्री नहीं हटाते हैं, तो यह सुरक्षा लागू नहीं होगी.

इसके अलावा, ‘सहयोग’ पोर्टल – जो विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा सामग्री हटाने के आदेश जारी करने के लिए बनाया गया एक मंच है – गृह मंत्रालय द्वारा संचालित है, जिससे अमित शाह के मंत्रालय को इंटरनेट पर लगभग पूर्ण नियंत्रण मिल गया है.

द वायर ने पहले रिपोर्ट किया था, अब केवल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय या इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ही अनुचित मानी जाने वाली सामग्री को चिह्नित कर हटाने का अधिकार नहीं रखते. ‘सहयोग’ पोर्टल बड़े पैमाने पर सामग्री हटाने और इस प्रक्रिया को लगभग स्वचालित बनाने की सुविधा देता है, जिससे ‘मध्यस्थों’ पर सामग्री सेंसर करने का दबाव पड़ता है.

‘सहयोग’ पोर्टल को कार्यपालिका के अतिक्रमण का उदाहरण बताते हुए एक्स ने इसे अदालत में चुनौती दी है.

यह पोर्टल गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) द्वारा विकसित किया गया है. इससे पहले सामग्री ब्लॉक करने के लिए लिखित आदेश, कारणों का उल्लेख, प्रभावित पक्ष को नोटिस और न्यायिक समिति द्वारा समीक्षा आवश्यक होती थी.

10 फरवरी को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिससे सामग्री हटाने की समयसीमा 24-36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई है. ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि इस समयसीमा को और घटाकर एक घंटा किया जा सकता है.

आलोचकों का कहना है कि गृह मंत्रालय द्वारा इस तरह की कार्रवाई दरअसल एक नए और औपचारिक सेंसरशिप व्यवस्था की तरह है, जिसे चुपचाप लागू कर दिया गया है.

Source: The Wire