कर्नाटक में चल रही SSLC परीक्षाओं में तीसरी भाषा के लिए ग्रेडिंग प्रणाली लागू कर दी गई है। यह घोषणा स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री Madhu Bangarappa ने शुक्रवार को की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा में प्राप्त अंकों को अंतिम कुल परिणाम (एग्रीगेट) में नहीं जोड़ा जाएगा। हालांकि, इस विषय में परीक्षा देना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा, “इसमें पास या फेल की कोई व्यवस्था नहीं होगी। छात्रों का मूल्यांकन केवल ग्रेड के आधार पर किया जाएगा।”

यह निर्णय कन्नड़ समर्थक संगठनों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के बाद लिया गया है, जो स्कूलों में हिंदी थोपे जाने के विरोध में थे। हालांकि, तीसरी भाषा के रूप में केवल हिंदी ही विकल्प नहीं है, लेकिन अधिकांश संस्थानों में उपलब्धता के कारण इसे सबसे अधिक छात्र चुनते हैं। पिछली एसएसएलसी परीक्षा में करीब 1.48 लाख छात्र हिंदी में असफल हुए थे। इस वर्ष तीसरी भाषा की परीक्षा 31 मार्च को निर्धारित है।

इसके साथ ही मंत्री ने कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा में भी संशोधन की घोषणा की। नया नियम सभी बोर्डों—CBSE, ICSE, अंतरराष्ट्रीय और राज्य बोर्ड—पर समान रूप से लागू होगा। अब 5 वर्ष 10 महीने की आयु के बच्चे प्रवेश के पात्र होंगे, साथ ही यह दो महीने की छूट किंडरगार्टन स्तर पर भी लागू की गई है।