2 करोड़ रुपये की इंश्योरेंस रकम के लिए पूर्व सैनिक के कत्ल के मामले में अब एक ऐसा बड़ा ट्विस्ट सामने आया है, जिसने खुद खाकी महकमे को भी हिला कर रख दिया है। जांच के दौरान यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कत्ल के असली सबूतों को मिटाने के लिए बेलगावी पुलिस कमिश्नर ऑफिस के कुछ कर्मचारियों ने ही आरोपियों का साथ दिया था।
यमकनमर्डी के सीपीआई जावेद मुशापुरे की जांच में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि पूर्व सैनिक संदीप मांजरी हत्याकांड के अहम सबूत बाहर न आएं, इसके लिए कमिश्नर कार्यालय के कर्मचारियों ने पर्दे के पीछे से मदद की थी।
हुक्केरी तालुका के घोडगेरी गांव के रहने वाले पूर्व सैनिक संदीप मांजरी की मौत की जांच कर रहे सीपीआई जावेद मुशापुरे को विभाग के अंदर का एक काला चेहरा देखने को मिला है। जांच में मिले सुरागों के मुताबिक, 2 करोड़ रुपये की इंश्योरेंस रकम हासिल करने के लिए संदीप की पत्नी सुमा और उसके प्रेमी पुंडलिक ने अस्पताल में सलाइन के जरिए कीटनाशक मिलाकर उसकी हत्या की थी। इतना ही नहीं, इस हत्या को छिपाने के लिए आरोपियों ने कमिश्नर कार्यालय के कर्मचारियों का भी इस्तेमाल किया था।
सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर के सबूत सामने न आएं, इसके लिए संबंधित पुलिस कर्मचारी ने अहम भूमिका निभाई थी। अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उसने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को भी मैनेज किया और पूरे हत्या मामले की जांच को भटकाने तथा सबूत मिटाने की साजिश रची।
फिलहाल सीपीआई जावेद मुशापुरे के नेतृत्व में पुलिस टीम आरोपी प्रेमी जोड़े के साथ-साथ सबूत मिटाने में मदद करने वाले कमिश्नर कार्यालय के कर्मचारियों और जांच से कथित तौर पर समझौता करने वाले लैब अधिकारियों से भी गहन पूछताछ कर रही है।
हत्या के बाद सबूतों को खत्म करने के लिए पुलिस विभाग के ही कुछ कर्मचारियों का इस्तेमाल किए जाने का यह मामला जिले में अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में भारी सनसनी फैल गई है।

