बेंगलुरु: RSS को जारी किए गए नोटिस को लेकर बीजेपी और संघ परिवार के नेताओं की आलोचनाओं पर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आज तीखा पलटवार किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अगर उनका मुंह बंद कराना है तो बयानबाज़ी छोड़कर मांगे गए दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं।

प्रियांक खड़गे ने कहा कि जो नियम दूसरे संगठनों पर लागू होते हैं, वही RSS पर भी लागू होंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राहुल गांधी या सरकार के प्रतिनिधि विदेश जाते हैं तो उनसे फंडिंग और खर्च का हिसाब मांगा जाता है, तो फिर RSS प्रमुख मोहन भागवत की विदेश यात्राओं और उनके प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) के बारे में जानकारी मांगना गलत कैसे हो सकता है?

उन्होंने कहा, “हम किसी मज़हब के रजिस्ट्रेशन की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक संगठन के रजिस्ट्रेशन और उसकी कानूनी स्थिति के बारे में जानकारी मांग रहे हैं। सौ साल पूरे करने का जश्न मनाने वाले संगठन को संविधान और कानून का सम्मान करना चाहिए।”

गृह मंत्री ने आगे कहा कि यह सवाल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं बल्कि सरकार की ओर से पूछे जा रहे हैं। उन्होंने RSS से अपने कार्यक्रमों और गतिविधियों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बनाए रखने की अपील की।

खड़गे ने कहा, “अपने कार्यकर्ताओं को सड़कों पर उतारकर नारेबाज़ी करवाने के बजाय, कानूनी सलाहकारों के माध्यम से आधिकारिक जवाब दीजिए। हमने जो सात सवाल पूछे हैं, उनका जवाब संबंधित दस्तावेज़ों के साथ सीधे दीजिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि RSS प्रमुख मोहन भागवत को केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली विशेष सुरक्षा और एडवांस सिक्योरिटी क्लीयरेंस की आवश्यकता है या नहीं, इसका फैसला जनता स्वयं करे। उन्होंने याद दिलाया कि RSS के पथ संचलनों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों का वेतन जनता के टैक्स के पैसे से दिया जाता है।

प्रियांक खड़गे ने अंत में संघ नेतृत्व को सीधी चुनौती देते हुए कहा, “अपने लोगों से शोर मचवाना बंद कीजिए और सरकार द्वारा पूछे गए सात सवालों का जवाब प्रमाण और दस्तावेज़ों के साथ दीजिए।”