बेलगावी में बिजली वितरण के निजीकरण के खिलाफ हेस्कॉम कर्मचारियों का विशाल प्रदर्शन
बेलगावी में बिजली वितरण के निजीकरण की सरकारी नीति के विरोध में केपीटीसीएल कर्मचारियों और अधिकारियों के संघ ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की है। टाटा पावर को चुनिंदा व्यावसायिक क्षेत्रों में बिजली वितरण की अनुमति न देने की मांग को लेकर हेस्कॉम कर्मचारियों और लाइसेंसधारी ठेकेदारों ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय के सामने विशाल प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि बिजली वितरण के निजीकरण से केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक कर हस्ताक्षर अभियान चलाने तथा बेंगलुरु में ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया है।
प्रदर्शन में शामिल महिला कर्मचारियों ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान हेस्कॉम कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर ईमानदारी से सेवाएं दीं। प्राकृतिक आपदाओं के समय भी बेलगावी के बिजली कर्मियों ने अन्य जिलों में जाकर उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कीं। ऐसे में हेस्कॉम जैसी जनसेवा निजी कंपनियां नहीं दे सकतीं।
मजदूर संगठन के संगठन सचिव मारुति दोड्डमनि ने बताया कि टाटा पावर ने विद्युत अधिनियम-2003 के तहत समानांतर बिजली वितरण नेटवर्क स्थापित करने के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि यदि निजी कंपनी को अनुमति मिलती है तो उपभोक्ताओं को गृह ज्योति, भाग्य ज्योति जैसी सरकारी सब्सिडी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें दोहरी बिलिंग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए आम जनता से इस आंदोलन का समर्थन करने की अपील की गई।
इस प्रदर्शन में अधीक्षण अभियंता प्रवीण कुमार चिकडे, शिवाजीराव कर्रे, विनोद केरूर, संजय गोंसाल्विस, मारुति दोड्डमनि, सदानंद कुरेर, अरविंद गदगकर सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे।
टाटा पावर के आवेदन पर कर्मचारियों की चिंता
हेस्कॉम के कार्यक्षेत्र के सात जिलों में वर्तमान में केवल हेस्कॉम को बिजली वितरण का लाइसेंस प्राप्त है। हालांकि, टाटा पावर ने बेलगावी, धारवाड़ और उत्तर कन्नड़ जिलों में बिजली वितरण की अनुमति के लिए बेंगलुरु स्थित केईआरसी (कर्नाटक विद्युत विनियामक आयोग) में आवेदन किया है।
केईबी कर्मचारी संघ के सचिव दीपक डी. ने चिंता जताते हुए कहा कि निजी कंपनी केवल लाभदायक व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने बताया कि हेस्कॉम अपने प्राप्त 100 यूनिट बिजली में से लगभग 55 यूनिट किसानों को उपलब्ध कराता है, जबकि केवल 15 प्रतिशत बिजली उद्योगों को दी जाती है। उद्योगों से प्राप्त राजस्व के माध्यम से किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी का भार वहन किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि टाटा पावर को अनुमति दी जाती है, तो उपभोक्ताओं को हेस्कॉम की तुलना में अधिक शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

