वो शख्स जो खुद टूट जाता है, मगर औलाद को बिखरने नहीं देता

यौम-ए-वालिद पर इस ख़ामोश हीरो को सलाम

 

मां के बाद औलाद का सबसे बड़ा जज़्बाती, इंसानी और अख़लाक़ी सहारा वालिद (पिता) होता है। वहीं माली (आर्थिक) सहारे के लिहाज़ से भी वालिद की अहमियत आज भी सबसे ऊपर है। बच्चों की ज़िंदगी का पहला आर्थिक सहारा उनका बाप ही होता है। इसी वजह से दुनिया भर में अलग-अलग तारीख़ों पर फ़ादर्स डे (यौम-ए-वालिद) मनाया जाता है।

भारत, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में जून के तीसरे रविवार को फ़ादर्स डे मनाया जाता है, जबकि दुनिया के दूसरे मुल्कों में इसकी तारीख़ें अलग-अलग हैं।

इस्लाम में वालिदैन (मां-बाप) का मुक़ाम बेहद बुलंद रखा गया है। क़ुरआन और हदीस में अल्लाह और उसके रसूल ﷺ के बाद मां-बाप की फ़रमांबरदारी और इज़्ज़त पर ज़ोर दिया गया है। हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फ़रमाया कि औलाद और उसका माल भी वालिद का हक़ रखता है।

आज के दौर में मदर्स डे तो खूब याद रखा जाता है, लेकिन अक्सर फ़ादर्स डे नज़रअंदाज़ हो जाता है। जबकि बाप वह शख्स है जो अपनी तमाम मुश्किलों, तकलीफ़ों और ज़िम्मेदारियों को छुपाकर औलाद के लिए मज़बूत चट्टान बनकर खड़ा रहता है।

अगर आपके वालिद ज़िंदा हैं तो उनकी ख़िदमत कीजिए, उन्हें खुश रखिए। और अगर वह इस दुनिया में नहीं हैं तो उनके लिए दुआ, सदक़ा और ख़ैरात के ज़रिए सवाब पहुंचाइए।

उर्दू अदब में भी बाप के मुक़ाम को बड़ी ख़ूबसूरती से बयान किया गया है। मशहूर शायरों ने वालिद की मोहब्बत, कुर्बानी और अज़मत को अपने अशआर में अमर कर दिया है।

“अज़ीज़-तर मुझे रखता है वो रग-ए-जां से,
ये बात सच है मेरा बाप कम नहीं मां से।”

— ताहिर शहीर

“मुझको थकने नहीं देता ये ज़रूरत का पहाड़,
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते।”

— मेराज फ़ैज़ाबादी

“बीटियां बाप की आंखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं,
और कोई दूसरा उस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं।”

— इफ़्तिख़ार आरिफ

लेखक ने कहा कि आज के बदलते दौर में जहां बुज़ुर्ग मां-बाप को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है, वहां समाज को रिश्तों की अहमियत फिर से समझने की ज़रूरत है। अदब, तहज़ीब और मज़हबी तालीमात हमें यही सिखाती हैं कि मां-बाप की इज़्ज़त और ख़िदमत ही इंसान की कामयाबी का रास्ता है।

यौम-ए-वालिद के मौके पर आइए, उस ख़ामोश हीरो को सलाम करें, जो अपनी पूरी ज़िंदगी औलाद की खुशियों के लिए कुर्बान कर देता है।

“आप की वजह से मैं भी दुनिया में हूं,
आप हैं तो मैं हूं, वालिद-ए-मुहतरम।”

अल्लाह तआला तमाम वालिदैन को लंबी उम्र, सेहत और खुशहाली अता फ़रमाए और औलाद को उनका फ़रमांबरदार बनाए। आमीन।

लेखक: मोहम्मद यूसुफ रहीम बेदरी

Source: Haqeeqat Times (Translated in hindi)