बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने केंद्र सरकार पर ED, इनकम टैक्स (IT) और CBI जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का सियासी मक़सद से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। कर्नाटक के अधिकारियों पर हाल ही में हुई कार्रवाई की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
प्रियंक खड़गे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में हज़ारों छापे मारे गए, लेकिन ED की सज़ा (Conviction) की दर 2 प्रतिशत से भी कम रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इतने छापों के बावजूद दोषसिद्धि इतनी कम है, तो क्या इसे राजनीतिक मंशा से प्रेरित नहीं माना जाना चाहिए?
उन्होंने आरोप लगाया कि इनकम टैक्स विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) केंद्र सरकार के औज़ार बन चुके हैं और ज़रूरत पड़ने पर इन्हें राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है।
खड़गे ने कहा कि भाजपा नेताओं के लगातार ऐसे बयान, जिनमें कांग्रेस नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की बात कही जाती है, इस धारणा को और मज़बूत करते हैं कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह खुद भी ऐसी कार्रवाई का सामना कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि “यह पूरी तरह मुमकिन है। आज नहीं तो कल हो सकता है। भाजपा के सांसद, विधायक और नेता लगातार धमकियां दे रहे हैं, सोशल मीडिया पर भी ऐसी बातें लिख रहे हैं और हमें सीधे फोन कर भी यही कहते हैं। इसमें नया क्या है?”
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित बेंगलुरु दौरे पर प्रियंक खड़गे ने तंज कसते हुए कहा कि शायद वह आरएसएस के पंजीकरण और वित्तीय दस्तावेज़ लेकर आ रहे हों। उन्होंने कहा कि वह पिछले एक महीने से आरएसएस से उसके रजिस्ट्रेशन और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने दोहराया कि आरएसएस भी कानून के दायरे में रहकर ही काम कर सकता है और कानून की सीमा का उल्लंघन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ कानूनी है तो अब तक दस्तावेज़ क्यों नहीं दिए गए? दस्तावेज़ मांगना कोई ग़लत बात नहीं है।
कानूनी लड़ाई के सवाल पर खड़गे ने कहा कि उन्होंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है। उन्होंने सिर्फ सवाल पूछे हैं और अब जवाब देना आरएसएस की ज़िम्मेदारी है। उनका कहना था कि उनके सवालों का जवाब देने के बजाय भाजपा नेता व्यक्तिगत हमले कर रहे हैं।
प्रियंक खड़गे ने कहा, “अगर भाजपा नेता मेरा नाम न लें तो उन्हें शायद प्रमोशन नहीं मिलता। चाहे विपक्ष के नेता आर. अशोक हों या सांसद तेजस्वी सूर्या, सबको मेरा नाम लेना ज़रूरी लगता है।”
अंत में उन्होंने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि आरएसएस अपने दस्तावेज़ और जवाब सार्वजनिक करे। अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है, तो दस्तावेज़ देने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।
Source: Sahil Online(Translated In hindi)

