MES का आरोप है कि कर्नाटक सरकार बेलगावी के मराठी भाषी लोगों के साथ नाइंसाफी कर रही है और उन्हें वोटिंग से महरूम करने की कोशिश की जा रही है। संगठन का कहना है कि बेलगावी उत्तर, दक्षिण और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी तादाद में मराठी भाषी मतदाता हैं, लेकिन SIR के दस्तावेज़ सिर्फ़ कन्नड़ में होने की वजह से उन्हें जानकारी समझने में दिक्कत हो रही है।
MES अध्यक्ष प्रकाश मरगाले ने मांग की कि घर-घर जाने वाले BLO मराठी भाषा में दस्तावेज़ उपलब्ध कराएं और जब तक मराठी में SIR फॉर्म नहीं दिए जाते, तब तक Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया को रोक दिया जाए।
वहीं एडवोकेट अमर यल्लूरकर ने आरोप लगाया कि मराठी भाषी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 15 से 18 हज़ार फर्ज़ी वोट जोड़े गए हैं। उन्होंने इस कथित फर्ज़ी मतदान पर रोक लगाने के लिए बेलगावी उत्तर, दक्षिण और ग्रामीण क्षेत्रों में वोटर आईडी को आधार से लिंक करने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि मराठी भाषा में आवेदन फॉर्म उपलब्ध होने तक SIR प्रक्रिया स्थगित की जाए। साथ ही, वार्डों की संख्या में बदलाव के बहाने मराठी मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, इसलिए जांच के लिए 2002 की वोटर लिस्ट उपलब्ध कराने की भी मांग चुनाव अधिकारियों से की गई।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व महापौर शिवाजीराव सुंठकर, रेणु किल्लेकर, सरिता पाटील, पंढरी परब, रणजीत चव्हाण पाटील, मदन बामणे, युवा समिति के अंकुश केसरकर समेत कई MES पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

