केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया बेहतर तरीके से आगे बढ़ रही है। लेकिन कर्नाटक सरकार ने बिना किसी कानूनी आधार के स्थायी निवासी (Permanent Resident) को अनिवार्य बनाने की अधिसूचना जारी कर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का काम किया है। राज्य सरकार अवैध घुसपैठियों के लिए जन्नत तैयार करना चाहती है। यह आरोप भाजपा नेता एम.बी. ज़ीरली ने लगाया।

बेलगावी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एम.बी. ज़ीरली ने कहा कि पात्र भारतीय नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर प्रक्रिया व्यवस्थित रूप से चलाई जा रही है। लेकिन कर्नाटक सरकार के राजस्व विभाग ने 29 जून को एक अधिसूचना जारी कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए हर ग्राम पंचायत, नगर परिषद और स्थानीय निकायों में सहायता केंद्र (Help Desk) स्थापित करने की भी तैयारी की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम संविधान और कानून की भावना के खिलाफ है तथा भारतीय नागरिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता है। भाजपा इस फैसले का विरोध करती है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ज़ीरली ने कहा कि बिना कानूनी समर्थन के ऐसी अधिसूचना जारी कर राज्य सरकार “तुगलक दरबार” चला रही है। इससे वास्तविक भारतीय नागरिक सरकारी सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार स्थायी निवास को अनिवार्य बनाने वाली इस अधिसूचना को तत्काल वापस ले।

उन्होंने यह भी दावा किया कि बेलगावी और बेंगलुरु में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए रह रहे हैं। सरकार को ऐसे लोगों की हिफाज़त करने के बजाय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्य के नागरिकों के लिए निर्धारित सुविधाएं किसी और तक न पहुंचें।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमहापौर हनुमंत कोंगाली, नगरसेवक राजशेखर ढोणी, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल बेनके, शहर अध्यक्ष गीता सुतार, पूर्व विधायक संजय पाटिल, रमेश देशपांडे, उज्वला बडवण्णाचे, राजेंद्र हरकुनी, ईरय्या खोत सहित अन्य भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।