बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई गन्ना किसानों की बैठक पूरी तरह नाकाम रही। बैठक में कोई ठोस फैसला नहीं होने से किसानों में भारी नाराजगी और मायूसी है। सरकार और चीनी मिल मालिकों के रवैये के खिलाफ कल कन्नड़ साहित्य भवन में गन्ना किसानों की अहम बैठक बुलाई गई है। किसान नेता राघवेंद्र नाइक ने चेतावनी दी है कि अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के बेनतीजा रहने से गन्ना किसानों में गुस्सा बढ़ गया है। किसानों को उम्मीद थी कि 26 नवंबर से चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो जाएगी, लेकिन अब उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
मौजूदा वक्त में भीषण सूखे और पानी की कमी के कारण खेतों में गन्ने की फसल सूख रही है। ऐसे में किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार से जल्द से जल्द चीनी मिलें शुरू करने की मांग की है।
किसान नेता राघवेंद्र नाइक ने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर, जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली, डॉ. प्रभाकर कोरे और निखिल कत्ती समेत कई नेता सिर्फ बयानबाजी में किसानों के साथ खड़े होने की बात करते हैं, लेकिन हकीकत में किसानों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं।
किसान नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चीनी मिल मालिक भारी मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन गन्ने की ढुलाई के दौरान हर ट्रिप पर 2 से 3 टन तक वजन कम दिखाकर किसानों और ट्रैक्टर मालिकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
वहीं, किसान नेता सुरेश परगोंड ने कहा कि MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य और गन्ने की रिकवरी के मामले में भी किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है। किसानों ने रातभर धरना देने और भूख हड़ताल करने के बावजूद सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है।
इन्हीं मुद्दों को लेकर कल कन्नड़ साहित्य भवन में गन्ना किसानों की अहम बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि सरकार और चीनी मिल मालिकों ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
इस मौके पर किसान नेता सुरेश परगन्नवर समेत कई अन्य किसान नेता मौजूद थे।

