कर्नाटक में नफ़रत भरे भाषण देने वाले बौखलाए

कर्नाटक विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन, 18 दिसंबर 2025 को, विपक्षी भाजपा के विरोध और हंगामे के बीच एक अहम विधेयक पास किया गया। यह विधेयक नफ़रत भरे भाषण और नफ़रत पर आधारित अपराधों को रोकने के लिए लाया गया है। राज्यपाल की मंज़ूरी के बाद यह कानून लागू हो जाएगा।

देश के कई हिस्सों में धार्मिक नफ़रत फैलाकर समाज में अशांति पैदा की गई है। कर्नाटक में भी ऐसा माहौल खासतौर पर भाजपा के शासनकाल में बढ़ा। सत्ता से बाहर होने के बाद भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर आरोप है कि उन्होंने धर्म के नाम पर भड़काऊ भाषण दिए और भीड़ हिंसा व मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को बढ़ावा दिया।

हालाँकि नफ़रत भरे भाषण रोकने के लिए देश में पहले से कानून मौजूद हैं। वर्ष 2023 में संसद ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) कानून पास किया, जो जुलाई 2024 से लागू है। इसके बावजूद पूरे देश में भड़काऊ बयानबाज़ी जारी है।

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार लंबे समय से इस समस्या पर नियंत्रण की कोशिश कर रही थी। दिसंबर में विधानसभा और विधान परिषद में नफ़रत भरे भाषण और नफ़रत आधारित अपराधों के खिलाफ यह नया कानून पास किया गया। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर लोगों को निशाना बनाने से रोकना है।

विधेयक पेश करते समय गृहमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने कहा कि यह कानून नफ़रत फैलाने वाले भाषणों और अपराधों के प्रसार को रोकने के लिए है। इसमें दोषियों को सज़ा और पीड़ितों को मुआवज़ा देने का प्रावधान है। सरकार के अनुसार यह कानून जिम्मेदार बोल और आपसी सहिष्णुता को बढ़ावा देगा।

यह कानून ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में नफ़रत भरे भाषणों पर बहस चल रही है। कर्नाटक का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण माना जा रहा है।

भाजपा ने इस कानून का विरोध किया है। विपक्ष का कहना है कि नए कानून की जरूरत नहीं है, यह राजनीतिक बदले के लिए लाया गया है और इससे अभिव्यक्ति व प्रेस की आज़ादी पर असर पड़ेगा। भाजपा का दावा है कि नफ़रत से निपटने के लिए पहले से ही पर्याप्त कानून मौजूद हैं।

नए कानून के अनुसार धर्म, जाति, समुदाय, भाषा, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर नफ़रत फैलाना अपराध होगा। पहली बार दोषी पाए जाने पर 1 से 7 साल तक की सज़ा और जुर्माना हो सकता है। बार-बार अपराध करने पर सज़ा और बढ़ेगी। यह अपराध गैर-जमानती होगा।

सरकार का मानना है कि इस कानून से नफ़रत फैलाने वाले तत्वों पर सख़्त कार्रवाई होगी और राज्य में शांति व भाईचारे का माहौल मज़बूत होगा।

 

लेखक: मोहम्मद आज़म शाहिद

Source: Haqeeqat Time