अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत-अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौता हुआ है, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ 25 से घटाकर 18 प्रतिशत होगा और भारत अमेरिकी वस्तुओं पर सभी टैरिफ व गैर-टैरिफ शुल्क हटाएगा. हालांकि, दोनों सरकारों ने अब तक कोई औपचारिक दस्तावेज़ जारी नहीं किया है.
नई दिल्ली: अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार समझौता होने का दावा किया गया है, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले अमेरिकी टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इसके बदले भारत अमेरिका से आने वाले उत्पादों पर सभी टैरिफ और गैर-टैरिफ शुल्क हटाएगा. इस समझौते की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (2 फरवरी) को दी.
ट्रंप ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद तय हुआ. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि दोनों नेताओं ने ‘एक व्यापार समझौते पर सहमति’ जताई है.
ट्रंप की इस पोस्ट से लगभग एक घंटे पहले भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर जानकारी दी थी कि दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई है और लोगों से ‘अपडेट के लिए जुड़े रहने’ की अपील की थी. ट्रंप की घोषणा के बाद गोर ने लिखा कि वह इस व्यापार समझौते की खबर से ‘बेहद उत्साहित’ हैं और भारत-अमेरिका संबंधों में ‘असीम संभावनाएं’ हैं.
करीब आधे घंटे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक्स पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि अब ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है.
मोदी ने इस ‘शानदार घोषणा’ के लिए ‘भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से’ राष्ट्रपति ट्रंप का धन्यवाद किया. उन्होंने लिखा कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और सबसे बड़े लोकतंत्र साथ मिलकर काम करते हैं, तो इससे लोगों को लाभ होता है और आपसी सहयोग के नए अवसर खुलते हैं. मोदी ने यह भी कहा कि वह भारत-अमेरिका साझेदारी को ‘अभूतपूर्व ऊंचाइयों’ तक ले जाने के लिए ट्रंप के साथ काम करने को उत्सुक हैं.
हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पोस्ट में किसी औपचारिक व्यापार समझौते के होने का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया. उन्होंने न तो रूस से तेल खरीद रोकने और न ही अमेरिका से 500 अरब डॉलर से अधिक के उत्पाद खरीदने संबंधी उन दावों का जिक्र किया, जिन्हें ट्रंप ने अपनी पोस्ट में रखा था.
दोनों सरकारों की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट से आगे कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति या विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है.
इस बीच, अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और बाद में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ऐसे पहले भारतीय सरकारी अधिकारी बने जिन्होंने सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि एक व्यापार समझौता हुआ है. हालांकि, इन बयानों में भी समझौते के ब्योरे साझा नहीं किए गए.
पीयूष गोयल ने इसे ‘दो समान सोच वाले, निष्पक्ष व्यापार में विश्वास रखने वाले लोकतंत्रों की साझा समृद्धि का प्रतीक’ बताया. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में ‘एक ऐतिहासिक मोड़’ है, जो ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में देश की यात्रा को गति देगा.
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने पोस्ट में केवल ‘द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े ऐलानों’ का उल्लेख किया. उन्होंने लिखा, ‘मज़बूत आर्थिक संबंध हमारी रणनीतिक साझेदारी की सबसे ठोस बुनियाद होते हैं.’ जयशंकर इस समय अमेरिका में हैं, जहां वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी पहल ‘पैक्स सिलिका’ की बैठक में भाग ले रहे हैं.
ट्रंप के अनुसार, अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगाया जाने वाला पारस्परिक टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, जबकि भारत अमेरिका के खिलाफ अपने सभी टैरिफ और गैर-टैरिफ प्रतिबंध खत्म करेगा. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि मोदी ने ‘काफी बड़े स्तर पर अमेरिकी उत्पाद खरीदने’ की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें ऊर्जा, तकनीक, कृषि उत्पाद, कोयला और अन्य सामान शामिल हैं. उनके अनुसार, यह राशि 500 अरब डॉलर से अधिक होगी.
गौरतलब है कि भारत सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए अपने बजट में लगभग 586 अरब डॉलर के सालाना खर्च का प्रावधान किया है. वहीं 2024 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 220 अरब डॉलर का रहा. फरवरी में वॉशिंगटन में मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया था.
ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका तथा ‘संभावित रूप से वेनेज़ुएला’ से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हुए हैं. ट्रंप के मुताबिक, इससे यूक्रेन युद्ध को ‘खत्म करने में मदद’ मिलेगी.
हालांकि ट्रंप की पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भारत पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ, जिसके चलते कुछ भारतीय उत्पादों पर कुल अमेरिकी शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था, हटाया जाएगा या नहीं. बाद में अमेरिकी दूतावास के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि अब ‘अंतिम टैरिफ 18 प्रतिशत होगा’, जिससे संकेत मिलता है कि रूसी तेल आयात को लेकर लगाया गया दंडात्मक शुल्क हटा लिया गया है.
यह घोषणा ऐसे समय आई है जब ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तनाव बना हुआ था. अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ को लेकर एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसके तहत सभी आयातों पर 10 प्रतिशत का आधार शुल्क लगाया गया और इसके बाद देशों के हिसाब से अतिरिक्त टैरिफ तय किए गए. अगस्त में रूस से तेल आयात के मुद्दे पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था.
फोन कॉल के ज़रिये इस समझौते की घोषणा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. हाल ही में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा था कि वार्ता के एक अहम चरण में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से फोन न किए जाने के कारण भारत पहले एक प्राथमिक व्यापार समझौते से चूक गया था. लटनिक के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन में इस तरह का सीधा संवाद समझौतों को अंतिम रूप देने में निर्णायक भूमिका निभाता है.
ट्रंप ने इस समझौते को ‘तत्काल प्रभाव से लागू’ बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के प्रति ‘दोस्ती और सम्मान’ के कारण, और ‘उनके अनुरोध पर’ किया गया है.
इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने जिस तरीके से समझौते की घोषणा की गई, उसकी आलोचना की. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी ट्रंप वॉशिंगटन से ही भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम, भारत की तेल खरीद से जुड़े अपडेट और अब व्यापार समझौते की घोषणा कर चुके हैं.
रमेश ने एक्स पर लिखा, ‘प्रधानमंत्री मोदी किसी कारण से राष्ट्रपति ट्रंप के सामने साफ़ तौर पर दबाव में दिखाई देते हैं. पारंपरिक ‘बेयर हग’ तो अब इतिहास हो गया है, बल्कि वह उनके साथ दिखने में भी असहज लगते हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसा लगता है कि मोदी ने आख़िरकार समझौता कर लिया है. इसे किसी भी तरह से ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’ नहीं कहा जा सकता.’
Source: The Wire







