अमेरिका की मध्यस्थता से लागू संघर्षविराम के बावजूद गाज़ा में इज़रायली हमले जारी हैं. 4 फरवरी को अलग-अलग इलाक़ों में हुए हमलों में बच्चों, महिलाओं और एक पैरामेडिक (चिकित्सा सहायक) सहित 21–23 फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं.
नई दिल्ली: अमेरिका की मध्यस्थता से लागू किए गए संघर्षविराम के बावजूद गाजा पट्टी में इज़रायली सैन्य हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. बुधवार (4 फरवरी) को गाजा के अलग-अलग इलाक़ों में हुए इज़रायली हमलों में कम से कम 21 से 23 फ़िलिस्तीनी मारे गए, जिनमें कई बच्चे, महिलाएं और एक पैरामेडिक शामिल हैं. यह बीते चार महीनों में संघर्षविराम लागू होने के बाद सबसे घातक दिनों में से एक बताया जा रहा है.
अल जज़ीरा के सूत्रों के मुताबिक़, गाजा सिटी के तुफ़्फ़ाह और ज़ैतून इलाक़ों में हुई गोलाबारी में 14 लोगों की मौत हुई. दक्षिणी गाजा के ख़ान यूनिस के क़रीब क़िज़ान अबू रशवान और अल-मवासी इलाक़ों में विस्थापितों के टेंटों को निशाना बनाए जाने से कई और लोगों की जान गई. मरने वालों में एक 11 साल की बच्ची और दो शिशु भी शामिल हैं.
गाजा के शिफ़ा अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सलीमिया ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा, ‘हमारे लोगों के ख़िलाफ़ जनसंहार जारी है. अगर संघर्षविराम लागू है, तो फिर ये हमले क्यों हो रहे हैं?’
अल जज़ीरा के संवाददाता तारेक़ अबू अज़्ज़ूम के अनुसार, गाजा सिटी में कई रिहायशी मकानों को बिना किसी पूर्व चेतावनी के निशाना बनाया गया. उन्होंने बताया कि बीते कुछ घंटों में इज़रायली सैन्य गतिविधियों में तेज़ी आई है और ड्रोन लगातार मंडराते देखे जा रहे हैं, जिससे आगे और हमलों की आशंका बनी हुई है.
इज़रायल का कहना है कि ये हमले उसके एक रिज़र्व सैनिक पर हुए गोलीबारी के जवाब में किए गए, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इज़रायली सेना के मुताबिक़, यह घटना उत्तरी गाजा में उस ‘येलो लाइन’ के पास हुई, जो इज़रायली सैन्य नियंत्रण वाले इलाक़ों को दर्शाती है. हालांकि, स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इस लाइन को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे पूर्वी गाजा के निवासियों में डर का माहौल है.
गौरतलब है कि संघर्षविराम लागू होने के बाद से अब तक इज़रायल के हमलों में 520 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. कुल मिलाकर 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए युद्ध में अब तक 71,800 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी मारे गए हैं. संयुक्त राष्ट्र की एक जांच और कई मानवाधिकार संगठनों ने इन कार्रवाइयों को जनसंहार बताया है, जबकि इज़रायल इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है. इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में मामला भी चल रहा है.
इसी बीच, रफ़ाह सीमा पार से मेडिकल निकासी की प्रक्रिया भी लगातार बाधित हो रही है. फ़िलिस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, बुधवार को बीमार और घायल फ़िलिस्तीनियों के एक समूह को बाहर भेजने की योजना पहले रद्द कर दी गई थी, हालांकि बाद में इसे सीमित स्तर पर फिर से शुरू किया गया. गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि 18,000 से अधिक मरीज़ अब भी निकासी का इंतज़ार कर रहे हैं, जिनमें सैकड़ों की हालत गंभीर है.
गाजा के अलावा, क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में भी हिंसा जारी है. जेरिको में इज़रायली छापे के दौरान 24 वर्षीय फ़िलिस्तीनी युवक सईद नाएल अल-शेख़ की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं.
हालांकि संघर्षविराम के तहत कुछ क़ैदियों की अदला-बदली और मानवीय सहायता में आंशिक बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ज़मीनी हालात यह संकेत दे रहे हैं कि गाजा के लिए युद्ध अब भी पूरी तरह थमा नहीं है.
Source: The Wire







