वीबी–जी राम जी कानून मनरेगा की आत्मा के खिलाफ
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत पत्र

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)”, जिसे वीबी–जी राम जी कानून कहा जा रहा है, के क्रियान्वयन पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखा है। पत्र में मुख्यमंत्री ने इस कानून को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की आत्मा और मूल अवधारणा के विरुद्ध बताया है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, मनरेगा एक अधिकार-आधारित और मांग-आधारित रोजगार योजना थी, जिसके तहत ग्रामीण जनता को काम मांगने का कानूनी अधिकार प्राप्त था। जबकि नया कानून इस व्यवस्था को बदलकर अनुमति-आधारित प्रणाली में परिवर्तित कर रहा है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि नए कानून के तहत रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय संसाधनों की कोई स्पष्ट और सुनिश्चित गारंटी नहीं है। केंद्रीय सहायता को “मानक आवंटन” तक सीमित कर दिया गया है, जिसमें अधिकांश राज्यों को केवल 60 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। इससे वास्तविक मांग होने के बावजूद पंचायतों को फंड की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी चिंता व्यक्त की कि राज्यों के लिए आवंटन “वस्तुनिष्ठ मानदंडों” के आधार पर तय किया जाएगा, जिनका कानून में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है और जिन्हें किसी भी समय बदला जा सकता है। इससे मांग-आधारित व्यवस्था के स्थान पर ऊपर से थोपी गई प्रणाली लागू होने का खतरा है, जो ग्राम पंचायत स्तर पर सहभागी योजना के सिद्धांतों के विपरीत है।

वित्तीय पहलू पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि मनरेगा के तहत जहां अधिकांश राज्यों में केंद्र–राज्य का अनुपात 90:10 था, वहीं नए कानून में इसे 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। यह बदलाव राज्य सरकारों से सार्थक परामर्श के बिना किया गया है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि कोई राज्य अपनी निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी। इससे अधिक मांग वाले क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने में बाधा आ सकती है।

मुख्यमंत्री ने कृषि सत्र के दौरान 60 दिन पहले अधिसूचना जारी करने की शर्त को भी आपत्तिजनक बताया है। उनके अनुसार, इससे कृषि मजदूरों, आदिवासियों और कमजोर वर्गों के मजदूरी अधिकार प्रभावित हो सकते हैं तथा कम मजदूरी पर काम करने या शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन बढ़ सकता है।

सिद्धारमैया ने यह आशंका भी जताई कि नए कानून में बढ़ती तकनीकी निर्भरता डिजिटल सुविधाओं से वंचित गरीब, दलित और आदिवासी समुदायों को योजना से बाहर कर सकती है।

पत्र में संविधान के अनुच्छेद 258 और 280 का हवाला देते हुए कहा गया है कि यह कानून सहकारी संघवाद के सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि राज्य सरकारों से उचित परामर्श के बिना वित्तीय ढांचा लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी खेद जताया कि नए कानून में महात्मा गांधी का नाम शामिल नहीं है, जबकि रोजगार गारंटी कानून एक ऐतिहासिक, वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त और अधिकार-आधारित कानून है, जो गांधीजी के ग्राम स्वराज और अंत्योदय के विचारों का प्रतीक रहा है।

इन सभी बिंदुओं के मद्देनज़र मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वीबी–जी राम जी कानून के क्रियान्वयन को रोका जाए, राज्य सरकारों के साथ संवैधानिक दायरे में परामर्श किया जाए और ग्रामीण जनता के रोजगार के अधिकार को कमजोर होने से बचाया जाए।

Source: Haqeeqat Time (Translate in Hindi)