संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े और पहचान की चोरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से बेलगावी जिला प्रशासन ने जिले में होने वाले प्रत्येक संपत्ति लेन-देन के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया है।
यह आदेश 29 जनवरी 2026 को जिला मजिस्ट्रेट मोहम्मद रोशन द्वारा जारी किया गया, जो जिले के सभी उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालयों में तत्काल प्रभाव से लागू होगा। यह कदम हाल के दिनों में प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन), जाली दस्तावेजों और सरकारी व निजी जमीनों के अवैध हस्तांतरण के मामलों में हुई वृद्धि के मद्देनज़र उठाया गया है।
नए नियमों के तहत किसी भी प्रकार की गुमनामी या “प्रॉक्सी” हस्ताक्षर की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। आदेश के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
सार्वभौमिक प्रमाणीकरण: पंजीकरण प्रक्रिया में शामिल सभी पक्षों—खरीदार, विक्रेता, दानकर्ता, लाभार्थी और यहां तक कि संबंधित सरकारी अधिकारी—के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य होगा।
बायोमेट्रिक/फेस वेरिफिकेशन: पहले की व्यवस्था, जिसमें पैन कार्ड या पासपोर्ट की साधारण फोटोकॉपी स्वीकार की जाती थी, को समाप्त कर दिया गया है। अब लाइव बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उपस्थित व्यक्ति ही वैध आधार धारक है।
जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) पर सख्त नियम: जीपीए से जुड़े लेन-देन को कड़ी निगरानी में रखा गया है। केवल पंजीकृत जीपीए ही मान्य होंगे, और दस्तावेज की वैधता सुनिश्चित करने के लिए दाता (ग्रांटर) को राजस्व अधिकारियों से जारी जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
फर्जीवाड़े में “चिंताजनक बढ़ोतरी” पर रोक
जिला अधिकारियों के अनुसार, फर्जी बिक्री विलेखों के मामलों ने न केवल न्यायिक व्यवस्था पर बोझ बढ़ाया है, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले विवादों के कारण सार्वजनिक असंतोष और कानून-व्यवस्था की समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। नए नियमों से ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद जताई गई है।







