बेलगावी: जिले के खानापुर समेत कई इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए एहतियाती कदम के तौर पर प्रमुख झरनों (वॉटरफॉल्स) की ओर जाने वाले जंगल के रास्ते फिलहाल बंद कर दिए गए हैं और पर्यटकों की एंट्री पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है। यह जानकारी जिला कलेक्टर मोहम्मद रोशन ने दी।

उन्होंने बताया कि जिले की नदियों में पानी का बहाव तेजी से बढ़ रहा है। आम लोगों और पर्यटकों से अपील की गई है कि वे नदी किनारे न जाएं और झरनों पर रील्स बनाने या किसी भी तरह का एडवेंचर करने से पूरी तरह परहेज करें।

पिछले 24 से 48 घंटों के दौरान अथणी, चिक्कोडी, हुक्केरी, रायबाग, सौंदत्ती, कित्तूर, निप्पाणी और कागवाड़ क्षेत्रों में 200 से 400 मिमी तक भारी बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई स्थानों पर नुकसान हुआ है।

महाराष्ट्र और स्थानीय क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण कृष्णा नदी में राजापुर बैराज के जरिए 59,857 क्यूसेक पानी आ रहा है। वहीं दूधगंगा और वेदगंगा नदियों से करीब 17,000 क्यूसेक पानी मिलाकर कुल जल हिप्परगी जलाशय (मौजूदा भंडारण 1.54 टीएमसी) में जमा हो रहा है।

घटप्रभा नदी के हिडकल जलाशय में 14,143 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई है, जबकि लोळसूर पुल गेज पर 8,580 क्यूसेक पानी गोकाक फॉल्स की ओर बह रहा है। मलप्रभा नदी में भी 2,069 क्यूसेक पानी की आवक रिकॉर्ड की गई है।

भारी बारिश के मद्देनज़र चिकले फॉल्स, परवाड़ फॉल्स, वज्रपोह फॉल्स और डेल्टा फॉल्स जाने वाले जंगल मार्ग अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं और पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

बेलगावी शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाले राकसकोप्प जलाशय में फिलहाल 0.04 टीएमसी पानी संग्रहित है। जलस्तर रोज़ाना लगभग आधा फुट बढ़ रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में पानी की कमी की आशंका नहीं है। इसके बावजूद कलेक्टर ने नागरिकों से पानी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की अपील की है।

पिछले दो दिनों में भारी बारिश के कारण जिले में मिट्टी की दीवार वाले पांच घर ढह गए हैं। फिलहाल जिले के सात पुल जलमग्न हैं, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है। अधिकारियों के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार हालात नियंत्रण में हैं।

चिक्कोडी तालुका के एक गांव में एक भैंस की मौत हुई है। जिला प्रशासन ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के नियमों के तहत प्रभावित परिवार को आज ही मुआवज़ा देने के निर्देश राजस्व अधिकारियों को दिए हैं।

डीसी कार्यालय में कंट्रोल रूम लगातार सक्रिय है और पुलिस व एसडीआरएफ की टीमें अलर्ट पर हैं। किसी भी आपात स्थिति में केवल 15 मिनट के भीतर राहत केंद्र शुरू करने की व्यवस्था की गई है। स्थानीय निकायों को संवेदनशील घरों की मैपिंग करने और पीडीओ तथा बिल कलेक्टरों के जरिए लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने लोगों को नदियों में नहाने, तेज बहाव वाले क्षेत्रों में जाने या पानी के बीच फंसे वाहनों की मरम्मत करने जैसी जोखिम भरी गतिविधियों से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी है।

जिला प्रशासन प्रमुख झरनों और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षित एवं नियंत्रित पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम कर रहा है। वन विभाग और डीसीएफ के साथ चर्चा के बाद अगले 10 से 20 दिनों में ‘गाइडेड टूर’ या सीमित बैचों में पर्यटकों को प्रवेश देने के लिए रोडमैप और दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।

डीसी मोहम्मद रोशन ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष गोकाक समेत कई झरनों पर बैरिकेड पार कर रील्स बनाने और स्टंट करने की घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई थी। उन्होंने कहा कि यदि लोग नियमों का पालन करेंगे तभी पर्यटन स्थलों को खोला जा सकेगा, अन्यथा दोबारा सख्त प्रतिबंध लागू करने पड़ेंगे।