बेलगावी: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में और NEET परीक्षा घोटाले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर बेलगावी में प्रगतिशील संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने डॉ. आंबेडकर सर्किल से जिलाधिकारी कार्यालय तक विशाल पदयात्रा निकाली और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की।
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता राजू टोपण्णवर ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET में हुई कथित अनियमितताएं और लगातार पेपर लीक की घटनाएं बेहद गंभीर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की बीजेपी सरकार इस पूरे मामले को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि देशभर में सामने आए कई पेपर लीक मामलों की कड़ियां गुजरात से जुड़ी हुई हैं और कुछ उद्योगपतियों के हितों के लिए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह 10-15 साल पहले जनता ने कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाकर बदलाव लाया था, उसी तरह आज भी देश में हालात बन चुके हैं। उनका आरोप था कि तीसरी बार सत्ता में आई मोदी सरकार जनविरोधी तरीके से काम कर रही है, इसलिए जनता को एक बार फिर सड़कों पर उतरकर बदलाव लाना होगा।
वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता शिवाजीराव कागणीकर ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर पेपर लीक होने के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अब तक नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 दिनों से छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार का कोई भी प्रतिनिधि उनकी बात सुनने के लिए आगे नहीं आया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन करने के बजाय मनमानी कर रही है। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ पेपर लीक के कारण अन्याय हो रहा है, जिससे कई छात्र मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। छात्रों का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
एक अन्य वक्ता ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे थे, लेकिन केंद्र सरकार ने उनसे बातचीत करने के बजाय उन्हें गिरफ्तार कर अनशन खत्म कराने की कोशिश की, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना हर नागरिक का अधिकार है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि NEET घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की शिक्षा नीति खामियों से भरी हुई है और शिक्षा के निजीकरण की दिशा में काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि शिक्षा का निजीकरण हुआ तो गरीब, दलित और महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विभिन्न प्रगतिशील संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।

