बेलगावी नगर निगम के ई-बर्थ रजिस्ट्रेशन सेक्शन में आम जनता की परेशानियां हद से ज़्यादा बढ़ गई हैं। जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) के लिए आवेदन करने के बाद भी लोगों को हफ्तों तक दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आरोप है कि कर्मचारी लापरवाही बरत रहे हैं, जबकि आम लोगों को सर्टिफिकेट नहीं मिल रहे, लेकिन बिचौलियों (एजेंटों) के ज़रिए वही काम सिर्फ दो दिन में हो रहा है। यह गंभीर आरोप खुद नगरसेवकों ने लगाया है।

बताया जा रहा है कि आवेदन जमा करने के 20 से 25 दिन बाद भी प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जा रहे। लोग कर्मचारियों की लापरवाही पर नाराज़गी जता रहे हैं। शिकायत है कि वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी अक्सर दफ्तर में मौजूद नहीं रहते और लोगों को हर रोज़ “कल आइए, परसों आइए” कहकर टाल दिया जाता है।

बालेकुंद्री, सांब्रा समेत दूर-दराज़ इलाकों से आने वाले लोग, यहां तक कि 82 साल के बुज़ुर्ग भी घंटों दफ्तर के बाहर इंतज़ार करने को मजबूर हैं। अस्पताल के सभी ज़रूरी दस्तावेज़ और आवेदन जमा करने के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा। परेशान लोगों का कहना है कि उन्हें अपना रोज़गार और ज़रूरी काम छोड़कर बार-बार निगम कार्यालय आना पड़ रहा है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से तुरंत दख़ल देकर लंबित प्रमाणपत्र जारी कराने की मांग की है।

इस बीच, विपक्षी नगरसेवक मुजम्मिल डोणी ने भी ई-बर्थ रजिस्ट्रेशन सेक्शन की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई। उनका आरोप है कि छोटी-छोटी गलतियों में सुधार कराने के लिए भी आम लोगों को कोर्ट के चक्कर लगाने पर मजबूर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि या सामाजिक कार्यकर्ता सिफारिश करें तो कर्मचारियों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती, लेकिन वही काम एजेंटों के ज़रिए सिर्फ दो दिनों में हो जाता है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए। बिचौलियों के इस कथित नेटवर्क पर रोक लगाने और जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए उनकी टीम जल्द ही मेयर के साथ बैठक कर उचित कार्रवाई की मांग करेगी।