बेलगावी: देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के मामलों के विरोध में बुधवार को बेलगावी में यूथ कांग्रेस और छात्रों ने ज़ोरदार प्रदर्शन किया। दिल्ली में चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और युवा शामिल हुए तथा केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी की।

बेलगावी के रानी चेन्नम्मा सर्कल पर यूथ कांग्रेस नेता अमन सेठ के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र और अभिभावक एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। उन्होंने आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को इंसाफ़ और उचित मुआवज़ा देने की मांग भी की।

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र 150 से अधिक बार लीक हुए हैं, जबकि हाल के समय में भी कई पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। उनका कहना था कि बार-बार होने वाली इन घटनाओं से युवाओं का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हो रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जिस प्रकार पेपर लीक होने पर छात्रों से दोबारा परीक्षा देने के लिए कहा जाता है, उसी तरह भ्रष्टाचार या गड़बड़ी में शामिल जनप्रतिनिधियों के लिए भी दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तत्काल इस्तीफ़ा देने की मांग की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश के छात्रों और अभिभावकों से माफ़ी मांगने का आग्रह किया।

मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कई अभिभावकों ने भावुक होकर कहा कि गरीब, किसान और मेहनतकश परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी लगा देते हैं, लेकिन व्यवस्था की खामियों के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर लग रहा है। उन्होंने छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने की भी निंदा करते हुए सरकार से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

इस अवसर पर यूथ कांग्रेस नेता अमन सेठ ने कहा कि डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले गरीब और मेहनती छात्रों के साथ व्यवस्था की विफलता के कारण अन्याय हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि लाखों छात्रों के भविष्य का फैसला करने वाली NTA में केवल 22 स्थायी सरकारी कर्मचारी हैं, जबकि अधिकांश कर्मचारी ठेका व्यवस्था पर कार्यरत हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है।

अमन सेठ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और न्याय की मांग को लेकर आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक युवाओं की आवाज़ उठती रहेगी।