बेंगलुरु, 29 जुलाई: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य सरकार और गृह विभाग किसी भी संगठन के “गुलाम” नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस को अपनी गतिविधियों, फंडिंग और दस्तावेज़ों में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए।
मीडिया से बातचीत में प्रियंक खरगे ने कहा कि आरएसएस ने अब तक उनके भेजे गए पत्र का कोई जवाब नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि आरएसएस से जवाब कैसे लिया जाता है, लेकिन वह इस बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ कहना उचित नहीं समझते। उन्होंने कहा कि वह एक विकसित राज्य के गृह मंत्री हैं और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करना जानते हैं।
प्रियंक खरगे ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से सवाल किया कि उन्होंने बिलकिस बानो केस के दोषियों के समर्थन में बयान क्यों दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर प्रह्लाद जोशी को जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी इस्तेमाल की गई भाषा बेहद आपत्तिजनक और अफसोसनाक है। प्रियंक खरगे ने मांग की कि मोहन भागवत अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
गृह मंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि अगर आरएसएस के विचार और सिद्धांत इतने आदर्श हैं, तो भाजपा नेताओं के बच्चे आरएसएस की शाखाओं में क्यों नहीं दिखाई देते और स्वयंसेवक क्यों नहीं बनते।
उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और भविष्य जैसे अहम मुद्दों पर बोलने वाले लोगों को सार्वजनिक मामलों में जिम्मेदारी और एहतियात के साथ बयान देना चाहिए, खासकर बिलकिस बानो जैसे संवेदनशील मामलों में।
प्रियंक खरगे ने दो टूक कहा कि कर्नाटक सरकार कानून के राज पर विश्वास करती है और किसी भी व्यक्ति या संगठन को कानून से ऊपर नहीं मानती।
Source: Haqeeqat times

