कर्नाटक में लगातार गहराते सूखे और फसलों के भारी नुकसान से परेशान किसानों ने आज बेलगावी में विशाल विरोध रैली निकाली। कर्नाटक राज्य रैत संघ और हरित सेना की अगुवाई में हुए इस आंदोलन में राज्य सरकार से तुरंत सूखा घोषित करने और किसानों की विभिन्न मांगों को पूरा करने की ज़ोरदार मांग की गई।
कर्नाटक राज्य रैत संघ और हरित सेना की ओर से, राज्याध्यक्ष वासुदेव मेठी और प्रो. एम.डी. नंजुंडस्वामी के मार्गदर्शन में आयोजित इस रैली में हजारों किसान और महिला किसान शामिल हुए। रैली शहर के ऐतिहासिक रानी चेन्नम्मा सर्कल से शुरू होकर जिलाधिकारी (डीसी) कार्यालय तक पैदल मार्च के रूप में निकाली गई।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कुछ समय के लिए रानी चेन्नम्मा सर्कल पर मानव श्रृंखला बनाकर सड़क जाम किया और सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया।
रैली के दौरान किसानों ने पूरे राज्य में सूखा घोषित करने, कृषि ऋण माफ़ करने, तीन कृषि कानूनों को वापस लेने और लंबित सिंचाई परियोजनाओं को जल्द लागू करने की मांग उठाई।
किसान नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री भी किसानों के बेटे हैं, इसलिए उन्हें किसानों की मौजूदा परेशानियों को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्याप्त बारिश नहीं होने से बीज और खाद डालकर तैयार की गई फसलें सूख रही हैं, जिससे किसान मजबूर होकर उन्हें पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
नेताओं ने विशेष रूप से बेलगावी जिले के रायबाग और मूडलगी के अंतिम हिस्सों तक नहर का पानी नहीं पहुंचने का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि राज्य में तुरंत सूखा घोषित कर संकटग्रस्त हर किसान के बैंक खाते में प्रति एकड़ ₹50,000 की राहत राशि सीधे जमा की जाए।
इसके अलावा, सूखे की वजह से गन्ना और मक्का की फसलें भी बर्बाद हो रही हैं। किसानों ने मांग की कि जिलाधिकारी और जिला प्रभारी मंत्री तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें और किसानों की समस्याएं सुनने के लिए विशेष बैठक बुलाएं।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि खाद और बीज वितरण में लागू एफआईडी (FID) नियमों को आसान बनाया जाए ताकि सभी किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सके। साथ ही किसानों की समस्याओं पर व्यापक चर्चा के लिए कम से कम 60 दिनों का विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग भी की गई।
बाद में किसानों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान, महिला किसान और विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

