बेळगावी के BIMS अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली मेडिकल सुविधाओं में लापरवाही और इंतज़ामिया की कमियों को लेकर राज्य के उपलोकायुक्त जस्टिस बी. वीरप्पा ने सख्त नाराज़गी जताई। बिना किसी पूर्व सूचना के अस्पताल का अचानक दौरा करने पहुंचे जस्टिस वीरप्पा ने अस्पताल की साफ-सफाई और इनडोर मरीजों की भीड़ को देखकर हैरानी जताई। उन्होंने सीनियर अधिकारियों को फौरन व्यवस्था सुधारने की सख्त हिदायत दी।
कर्नाटक के उपलोकायुक्त जस्टिस बी. वीरप्पा के बेळगावी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी BIMS जिला अस्पताल के अचानक दौरे से मेडिकल महकमे में हलचल मच गई। उन्होंने अस्पताल के अलग-अलग वार्डों और दवाइयां बांटने वाले काउंटरों का खुद मुआयना किया और मरीजों से सीधे बातचीत कर उनकी परेशानियां सुनीं।
OPD काउंटरों के सामने मरीजों की भारी भीड़ देखकर उन्होंने नाराज़गी जाहिर की। साथ ही, मरीजों की परेशानी कम करने के लिए ज्यादा काउंटर शुरू करने और भारतीय सैनिकों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था करने के सख्त निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान मरीजों की ड्रेसिंग सही तरीके से नहीं किए जाने पर भी उपलोकायुक्त ने डॉक्टरों की लापरवाही को लेकर कड़ी फटकार लगाई। इसके अलावा, अस्पताल में मुफ्त उपलब्ध दवाइयां मरीजों को देने के बजाय बाहर की मेडिकल दुकानों से दवाइयां खरीदने के लिए लिखे जाने पर उन्होंने सख्त एतराज़ जताया।
जस्टिस बी. वीरप्पा ने BIMS प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि मरीजों को तमाम ज़रूरी दवाइयां अस्पताल के अंदर ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए। किसी भी सूरत में गरीब मरीजों पर इलाज का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
इसी दौरान, दूसरे राज्यों से इलाज के लिए आए गैर-कन्नड़ भाषी मरीजों और उनके रिश्तेदारों से भी उपलोकायुक्त ने बातचीत की। उन्होंने दोस्ताना अंदाज़ में कहा कि इस ज़मीन का पानी पीते हैं और यहां का खाना खाते हैं, तो कन्नड़ भाषा भी ज़रूर सीखनी चाहिए।
जस्टिस वीरप्पा ने अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासनिक कर्मचारियों को हिदायत दी कि वे मरीजों के साथ पूरी संवेदनशीलता, इंसानियत और ज़िम्मेदारी के साथ पेश आएं। उन्होंने अपने इस दौरे के ज़रिए साफ संदेश दिया कि सरकारी अस्पतालों में आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

