बेलगावी: बेलगावी में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। जिला प्रशासन द्वारा लागू निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर जेल भरो आंदोलन करने की कोशिश कर रहे किसान नेता चून्नप्पा पूजारी समेत सैकड़ों किसानों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

शहर में कानून-व्यवस्था और जनहित बनाए रखने के लिए बीएनएस की धारा 163 लागू की गई है। गन्ने का उचित समर्थन मूल्य और प्रति टन अतिरिक्त 1,000 रुपये की दर घोषित करने की मांग को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन अब तीव्र संघर्ष का रूप ले चुका है।

जिला प्रशासन द्वारा बेलगावी शहर में बीएनएस की धारा 163 (पुरानी सीआरपीसी की धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने के बावजूद किसान नेता चून्नप्पा पूजारी के नेतृत्व में किसान मुक्तिमठ परिसर में जमा हुए और बड़े पैमाने पर जेल भरो आंदोलन की तैयारी करने लगे।

इस दौरान मौके पर पहुंची पुलिस और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। देखते ही देखते मुक्तिमठ परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस ने चून्नप्पा पूजारी समेत सैकड़ों किसानों को जबरन हिरासत में लिया और उन्हें विभिन्न पुलिस थानों तथा कल्याण मंडपों में ले जाया गया।

पुलिस हिरासत में रहते हुए किसान नेता चून्नप्पा पूजारी ने केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ कड़ा आक्रोश जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें किसान विरोधी नीतियां अपनाकर अन्नदाता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि किसान एकजुट होकर राज्यव्यापी उग्र आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं और मुख्यमंत्री को तुरंत गन्ने का उचित मूल्य घोषित करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि गिरफ्तारी, जेल या निषेधाज्ञा से किसानों का आंदोलन नहीं रुकेगा। जरूरत पड़ने पर राज्यभर में सड़क जाम और ‘कर्नाटक बंद’ करने से भी किसान पीछे नहीं हटेंगे।

इसके बाद चून्नप्पा पूजारी और अन्य किसानों को पुलिस वाहन में ले जाया गया। नेताओं की हिरासत की खबर फैलते ही जिले के विभिन्न तालुकों में किसानों ने जगह-जगह सड़क जाम कर अपना आक्रोश जताया।

दूसरी ओर, बेलगावी शहर के पुलिस आयुक्त प्रकाश निकम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि शहर में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा आम जनता के हितों की रक्षा करना पुलिस विभाग की प्राथमिकता है।

उन्होंने बताया कि रानी चन्नम्मा सर्कल समेत शहर के प्रमुख इलाकों में कई स्कूल, कॉलेज और बड़े अस्पताल हैं। ऐसे में परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थियों और आपातकालीन उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी न हो, इसी उद्देश्य से बीएनएस की धारा 163 लागू की गई है।

पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर प्रदर्शन करने पहुंचे 100 से अधिक किसानों को एहतियाती तौर पर अस्थायी हिरासत में लिया गया था, न कि आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। उन्हें शहर से बाहर ले जाने के बाद सुरक्षित रूप से उनके-अपने गांवों में भेज दिया गया।