मिशिगन में माइक रोजर्स को शिकस्त, जनवरी 2027 में लेंगे शपथ

वाशिंगटन, 4 नवंबर (हकीकत टाइम्स): अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनावों में मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अब्दुल रहमान मोहम्मद अल-सैयद ने सीनेट सीट पर जीत हासिल कर अमेरिकी सियासत में नया इतिहास रच दिया है। इस कामयाबी के साथ वह अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन जाएंगे। वह जनवरी 2027 में अपने पद की शपथ लेंगे।

42 वर्षीय अब्दुल रहमान मोहम्मद अल-सैयद ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व कांग्रेस सदस्य माइक रोजर्स को कड़े मुकाबले में शिकस्त दी। उनका चुनावी मुकाबला अमेरिका के अहम और चर्चित मुकाबलों में शामिल था। उनकी जीत न केवल अमेरिकी सियासत में मुसलमानों की नुमाइंदगी के लिहाज से ऐतिहासिक है, बल्कि इससे डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील राजनीतिक रुझानों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अल-सैयद की चुनावी मुहिम के दौरान उनकी मजहबी पहचान और इजरायल के बारे में उनके सख्त मौकिफ को भी सियासी बहस का मुद्दा बनाया गया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी मुहिम के दौरान उन पर तनकीद करते हुए उन्हें “जिहादी कट्टरपंथी” कहा था। ट्रंप द्वारा उनके बीच के नाम मोहम्मद को खास तौर पर उठाए जाने पर अल-सैयद ने जवाब दिया था, “आपके लिए मेरा नाम सीनेटर मोहम्मद होगा।” उन्होंने इस बयान को अपनी मजहबी पहचान पर होने वाली तनकीद का जवाब बताया।

तालीमी और पेशेवर पृष्ठभूमि

अब्दुल रहमान अल-सैयद का जन्म और परवरिश मिशिगन में हुई। उनके वालिद मिस्र से अमेरिका आकर बसे थे। उन्होंने शुरुआती तालीम सरकारी स्कूलों में हासिल की और बाद में मिशिगन यूनिवर्सिटी तथा कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की। इसके अलावा, रोड्स स्कॉलर के तौर पर उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की दूसरी डिग्री भी हासिल की।

वह सार्वजनिक स्वास्थ्य के विषयों पर किताबें लिख चुके हैं और कई तालीमी व शोध संस्थानों से जुड़े रहे हैं। उनकी पत्नी सारा जकाको पेशे से मनोवैज्ञानिक हैं और उनके वालिदैन भारतीय मूल के प्रवासी हैं।

चुनावी मुहिम में आम लोगों के मसाइल को तरजीह

अब्दुल रहमान अल-सैयद की चुनावी मुहिम का मुख्य केंद्र आम अमेरिकी नागरिकों की आर्थिक परेशानियां, महंगाई, स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और रोजगार के मौके रहे।

उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं को हर नागरिक की पहुंच में लाने के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम मेडिकेयर के विस्तार का वादा किया, ताकि लोगों को इलाज के खर्च, अतिरिक्त भुगतान और मेडिकल कर्ज के बोझ से राहत मिल सके।

उन्होंने खुद को डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट के बजाय पूंजीवादी निजाम का समर्थक बताया। हालांकि, उनकी चुनावी प्राथमिकताओं में सामाजिक कल्याण और मेहनतकश तबके की आर्थिक सुरक्षा को खास अहमियत हासिल रही।

इस लिहाज से उनकी सियासी सोच न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रगतिशील नेता अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज के विचारों से कुछ मामलों में मिलती-जुलती है।

मिशिगन अमेरिका की औद्योगिक तारीख में अहम मुकाम रखता है और इसे देश के औद्योगिक इलाके ‘रस्ट बेल्ट’ का हिस्सा माना जाता है। अल-सैयद ने विदेशों में स्थानांतरित हो चुकी औद्योगिक नौकरियों को वापस अमेरिका लाने, स्थानीय उद्योगों की हिफाजत और मजदूरों के हक मजबूत करने की हिमायत की।

उन्होंने पुराने मुक्त व्यापार समझौते नाफ्टा पर भी तनकीद की और अमेरिकी उद्योगों की हिफाजत के लिए चुनिंदा आयात शुल्क लगाने की पॉलिसी की हिमायत की।

फिलिस्तीन और इजरायल के बारे में मौकिफ

अब्दुल रहमान अल-सैयद इजरायल की पॉलिसियों और फिलिस्तीन के मामले में अमेरिकी सरकार की हिमायत के खुले आलोचक रहे हैं। मिशिगन में चुनावी सियासत के दौरान उनका यह मौकिफ खास अहमियत रखता था।

राज्य में पारंपरिक तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी की हिमायत करने वाले कुछ हलकों में भी उनके विचारों पर इख्तिलाफ सामने आया। यहां तक कि डेमोक्रेटिक पार्टी के एक नेता ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स की हिमायत कर दी थी।

चुनावी मुहिम के दौरान उनके नाम और मजहबी पहचान को भी बहस का मुद्दा बनाया गया। हालांकि, अल-सैयद ने साफ किया कि उनकी मजहबी पहचान को अवामी मसाइल से ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि उनका नाम न पेट्रोल की कीमतों में इजाफे की वजह है, न देश को जंग में झोंकने का कारण और न ही आम लोगों के लिए जरूरी चीजें खरीदना मुश्किल बनाने का जिम्मेदार है। इसके लिए गलत सरकारी पॉलिसियां जिम्मेदार हैं।

अमेरिकी सियासत पर संभावित असर

अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मुकाबला हुआ। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी को दोनों सदनों में बहुमत हासिल था। चुनाव के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों सदनों में अपनी स्थिति मजबूत करने और सीनेट का कंट्रोल हासिल करने की कोशिश में है।

मिशिगन में अब्दुल रहमान अल-सैयद की जीत डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए अहम कामयाबी मानी जा रही है। उनकी सफलता से पार्टी के उस प्रगतिशील धड़े को मजबूती मिल सकती है, जो अवामी कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं, महंगाई पर काबू और मेहनतकश तबके की आर्थिक हिफाजत को अपनी सियासी रणनीति का अहम हिस्सा बनाने का समर्थक है।

उनकी जीत का एक अहम पहलू यह भी है कि न्यूयॉर्क जैसे पारंपरिक उदारवादी इलाकों से बाहर भी अवामी कल्याण और आर्थिक मसाइल पर आधारित प्रगतिशील चुनावी मुहिम कामयाब हो सकती है। इसका असर भविष्य में डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी रणनीति और अमेरिका की घरेलू व विदेश नीति पर भी पड़ सकता है।

अब्दुल रहमान अल-सैयद का सीनेट के लिए चुना जाना सिर्फ एक मजहबी अल्पसंख्यक उम्मीदवार की कामयाबी नहीं, बल्कि अमेरिकी सियासत में नुमाइंदगी, राजनीतिक प्राथमिकताओं और अवामी मसाइल के हवाले से एक अहम पेशरफ्त के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी आने वाली संसदीय कारکردगी न सिर्फ अमेरिकी मुसलमानों, बल्कि मुल्क के मुख्तलिफ सामाजिक और नस्ली तबकों के लिए भी खास अहमियत रखेगी।

Source: Haqeeqat Times