आरएसएस की गतिविधियों पर अप्रत्यक्ष रोक — सरकारी स्थलों के उपयोग के लिए कर्नाटक कैबिनेट ने सख्त नियम मंज़ूर किए

कर्नाटक सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सरकारी स्थानों पर निजी संगठनों की गतिविधियों के आयोजन के लिए पूर्व अनुमति को अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री सिद्दरामैया की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय सर्वसम्मति से पारित किया गया।

सूत्रों के अनुसार, राज्य मंत्री प्रियांक खड़गे के पत्र पर विचार करने के बाद सरकार ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी निजी संस्था, संगठन या समूह — चाहे वह धार्मिक हो या सामाजिक — बिना पूर्व अनुमति के किसी भी सरकारी स्थल पर कार्यक्रम आयोजित नहीं कर सकेगा।

हालाँकि आदेश में किसी विशेष संगठन का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में है।

मंत्री प्रियांक खड़गे ने मीडिया से कहा, “कानून सबके लिए समान है। कोई भी संस्था या धार्मिक संगठन यदि सरकारी स्थान पर कार्यक्रम करना चाहता है, तो उसे पहले अनुमति लेनी होगी। पूर्व अनुमति प्राप्त करने में किसी को कठिनाई नहीं होनी चाहिए।”

नए नियम लागू होने के बाद अब राज्य में सभी निजी संस्थाएं, जिनमें सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठन शामिल हैं, किसी भी सरकारी मैदान, स्कूल या हॉल में कार्यक्रम करने से पहले प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

सरकार ने इस निर्णय के लिए वर्ष 2013 में भाजपा सरकार द्वारा जारी आदेश को ही आधार बनाया है, जिसके तहत निजी कार्यक्रमों के लिए अनुमति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य किया गया था।