नैतिक नेतृत्व की बागडोर वैचारिक नेताओं को सौंपी जानी चाहिए — यतिंद्र सिद्धरमैया
सतीश जारकीहोली का जिक्र, कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता की नई समीकरणों के संकेत

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के विधान परिषद सदस्य और बेटे यतिंद्र सिद्धरमैया ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि उनके पिता अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण में हैं और उन्हें किसी वैचारिक और प्रगतिशील नेता, जैसे कि लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली, का मार्गदर्शन करना चाहिए।

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अटकलें लगातार चल रही हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कई बार स्पष्ट किया है कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे, लेकिन पार्टी के भीतर दो गुटों — एक उनके समर्थकों का और दूसरा उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के समर्थकों का — के बीच सत्ता की खींचतान की खबरें आम हैं।

यतिंद्र ने बेलगावी में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए कहा: “मेरे पिता अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम चरण में हैं। अब उन्हें किसी ऐसे नेता का मार्गदर्शन करना चाहिए, जो मजबूत वैचारिक दृष्टिकोण और प्रगतिशील सोच रखता हो। सतीश जारकीहोली कांग्रेस के सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले ऐसे ही एक नेता हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि चूंकि सिद्धरमैया ने स्वयं घोषणा की है कि वह 2028 के बाद चुनाव नहीं लड़ेंगे, इसलिए उनका अनुभव पार्टी के युवा वैचारिक नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

मीडिया से बातचीत में यतिंद्र ने स्पष्ट किया: “मैंने केवल इतना कहा कि मेरे पिता सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखते हैं, और सतीश जारकीहोली भी इन्हीं सिद्धांतों का पालन करते हैं। इसलिए मेरे विचार में वह भविष्य में पार्टी के नेतृत्व के लिए योग्य नेताओं में से एक हैं।”

राजनीतिक विश्लेषकों का विश्लेषण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यतिंद्र का यह बयान महज भावनात्मक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद पार्टी के भीतर यह संदेश देना है कि सत्ता का केंद्र सिद्धरमैया खेमे के इर्द-गिर्द ही रहेगा।

डी. के. शिवकुमार का जवाब
उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “इस बारे में आपको उनसे (यतिंद्र) ही पूछना चाहिए। मैंने हमेशा कहा है कि हम दोनों पार्टी हाईकमान के फैसले के लिए प्रतिबद्ध हैं और मिलकर काम करते रहेंगे। नेतृत्व के मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है।”

पार्टी के आंतरिक सूत्र
पार्टी के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने बार-बार नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों का खंडन किया है, लेकिन सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता के नाजुक संतुलन को बनाए रखने के लिए हाईकमान स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।

यह बयान कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व के विवाद को और हवा दे रहा है और भविष्य की राजनीतिक समीकरणों पर नई बहस छेड़ दी है।