लाल क़िले के पास 10 नवंबर को हुए आतंकवादी हमले में 13 लोगों की मौत के बाद, घटना की गंभीरता कम होने से पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का 35 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर नए विवाद का कारण बन गया है।

क्लिप में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि “भारत में ISI की गतिविधियों के लिए मुसलमानों से ज़्यादा हिंदुओं को भर्ती किया गया है।”
हमले के बाद पहले से ही बढ़ी हुई साम्प्रदायिक बहस में इस बयान ने और आग भड़का दी है।

वायरल वीडियो के बाद CNN–NEWS18 से बात करते हुए अजित डोभाल ने इसे ‘डीपफेक’ बताया और स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वीडियो को सार्वजनिक राय को भ्रमित करने के लिए बनाया गया है। Moneycontrol ने भी यही राय दोहराई।

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https://x.com/CNNnews18/status/1990312633916928380?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1990312633916928380%7Ctwgr%5E9c3443b9264085d8d7fb084e7d94cf0c41f83606%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.varthabharati.in%2Fnational%2Ffact-check-ajit-doval-did-say-isi-recruited-more-hindus-than-muslims-deepfake-claim-false-2099697

लेकिन Alt News द्वारा किए गए फैक्ट चेक में पाया गया कि यह वीडियो डीपफेक नहीं है।
वायरल क्लिप के की-फ़्रेम्स की रिवर्स इमेज सर्च में पता चला कि यह हिस्सा 11 मार्च 2014 को दिए गए दोभाल के एक व्याख्यान का है। इस व्याख्यान को 20 मार्च 2014 को ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट ने यूट्यूब पर अपलोड किया था—जब डीपफेक तकनीक आम उपयोग में भी नहीं थी।

आधिकारिक वीडियो के 1 घंटे 4 मिनट के हिस्से में दोभाल स्वयं कहते हुए सुनाई देते हैं:
“1947 से अब तक ISI की भर्ती में अधिकतर हिंदू ही रहे हैं; मुसलमानों का प्रतिशत 20% भी नहीं था।”
इस तरह, फैक्ट चेक से यह स्पष्ट हुआ कि वायरल क्लिप नकली नहीं है और न ही AI डीपफेक है।

Alt News के अनुसार, अब वायरल हो रहा वीडियो दोभाल के लंबे व्याख्यान का सिर्फ एक चुना हुआ हिस्सा है। पूरे व्याख्यान में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को साम्प्रदायिक नज़रिए से देखने का कड़ा विरोध किया था।
उन्होंने कहा था कि भारतीय मुसलमान ऐतिहासिक रूप से आतंकवाद के खिलाफ खड़े रहे हैं।
दोभाल ने यह भी याद दिलाया था कि 2012 में रामलीला मैदान में 50,000 मौलानाओं ने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ फ़तवा जारी किया था
साथ ही कहा कि वैश्विक इस्लामी आतंकवाद के ज़्यादातर शिकार भी मुसलमान ही हैं, और भारतीय इस्लामी नेता भी इंडियन मुजाहिदीन की हिट-लिस्ट में शामिल रहे हैं।

Alt News ने कहा है कि वायरल वीडियो नकली नहीं, लेकिन संदर्भ से काटे गए हिस्से को साझा कर दोभाल के पूरे संदेश को गलत ढंग से पेश किया गया है।

Source: Vartha bharathi (Translate in hindi)