कर्नाटक में नफरत फैलाने वाले भाषण और अपराधों के खिलाफ सख्त विधेयक
पहली बार अपराध पर 7 साल तक की कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रस्ताव
कर्नाटक सरकार ने राज्य में बढ़ती नफरत फैलाने वाली भाषणबाज़ी और उससे उत्पन्न सामाजिक अशांति पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कड़े प्रावधानों वाला “राज्य नफरत फैलाने वाला भाषण व नफरत से जुड़े अपराध (रोकथाम एवं नियंत्रण) विधेयक–2025” विधानसभा में पेश किया है।
गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने आज विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए बताया कि पहली बार अपराध सिद्ध होने पर न्यूनतम 1 वर्ष और अधिकतम 7 वर्ष की कैद, तथा 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, अपराध की पुनरावृत्ति की स्थिति में सजा न्यूनतम 2 वर्ष से अधिकतम 10 वर्ष की कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माने तक बढ़ाई जाएगी।
विधेयक पेश किए जाने के दौरान भाजपा विधायकों ने कड़ा विरोध करते हुए नारेबाज़ी की, हालांकि विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. कादर ने विरोध के बावजूद विधेयक को सदन में पेश करने की अनुमति दी।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति, समूह या संस्था के खिलाफ नफरत फैलाने, उसे प्रकाशित करने या उसका प्रचार करने को दंडनीय अपराध माना जाएगा। नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़े मुकदमे गैर-जमानती होंगे। मामलों की सुनवाई प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी। इन मामलों की जांच डीएसपी रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी कर सकेंगे।
इसके अतिरिक्त, अधिकृत अधिकारियों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या डोमेन से नफरत फैलाने वाली सामग्री हटाने या उसे ब्लॉक करने का अधिकार भी दिया गया है। विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि नफरत फैलाने वाले भाषण और सामग्री की जिम्मेदारी केवल पंजीकृत ही नहीं, बल्कि गैर-पंजीकृत संगठनों पर भी लागू होगी।







