नई दिल्ली: देशभर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस ठगी में अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, आईपीएस या सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर आम नागरिकों को डराते हैं और उनसे बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं।
ठग फोन या वीडियो कॉल के ज़रिए संपर्क कर पीड़ितों को यह कहते हैं कि वे “डिजिटल अरेस्ट” में हैं और कॉल काटना अपराध है। इसके बाद उन्हें कथित जांच या सुरक्षित खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।
केंद्र सरकार ने इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता आंतरिक सुरक्षा के विशेष सचिव कर रहे हैं और इसमें कई केंद्रीय मंत्रालयों व एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं।
इस संबंध में Supreme Court of India में स्थिति रिपोर्ट भी दाखिल की गई है। इसके बाद अदालत ने Central Bureau of Investigation (CBI) को इस साइबर ठगी में शामिल नेटवर्क और आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बैंकों द्वारा फर्जी या म्यूल अकाउंट खोलने में किसी तरह की लापरवाही की जांच के भी आदेश दिए गए हैं।
समिति में गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, वित्त मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों का विभाग, Reserve Bank of India, दिल्ली पुलिस, एनआईए और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा गूगल, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ भी चर्चा की गई है।
बुज़ुर्ग दंपति से ₹14.85 करोड़ की ठगी
दिल्ली में एक बुज़ुर्ग दंपति से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹14.85 करोड़ की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ठगों ने खुद को टेलीकॉम विभाग और मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से फर्जी अदालत की कार्यवाही भी दिखाई।
ठगों के निर्देश पर दंपति ने कई दिनों तक आरटीजीएस के ज़रिए बड़ी रकम ट्रांसफर की। जब वे स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचे, तब उन्हें बताया गया कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया मौजूद ही नहीं है। इसके बाद साइबर क्राइम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई गई।
जनता के लिए चेतावनी
सरकारी एजेंसियों ने साफ किया है कि डिजिटल अरेस्ट पूरी तरह से एक धोखाधड़ी है और भारतीय कानून में इसका कोई अस्तित्व नहीं है। नागरिकों से अपील की गई है कि:
ऐसे किसी भी कॉल से घबराएं नहीं
पुलिस, कोर्ट या सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगने वालों को रकम न भेजें
तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराएं
लगातार बढ़ रहे ऐसे मामलों ने साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को और अधिक उजागर कर दिया है।







