देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाला सराफा उद्योग इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। सरकार के कथित अवैज्ञानिक फैसलों और सोने-चांदी की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान बेलगावी के सराफा व्यापारियों और कारीगरों ने अब सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है।
व्यापारियों का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाला यह उद्योग सरकारी नीतियों के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है। उनका आरोप है कि सोने पर टैक्स 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किए जाने और चांदी की कीमत केवल चार दिनों में 2 लाख 57 हजार रुपये से बढ़कर 3 लाख 1 हजार रुपये प्रति किलो पहुंचने से ग्राहकों और व्यापारियों दोनों पर भारी असर पड़ा है।
व्यापारियों ने कहा कि सनातन परंपराओं और विवाह समारोहों में सोना-चांदी अनिवार्य माना जाता है, लेकिन कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण लोग खरीदारी से दूर हो रहे हैं। “सोना मत खरीदो” जैसी अपीलें देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली हैं। भारत हर साल करीब 7 लाख करोड़ रुपये का सोना विदेशों से आयात करता है और देश के 80 प्रतिशत लोग विदेशी सोने पर निर्भर हैं।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी और कोरोना महामारी के बाद पहले ही करीब 50 प्रतिशत रोजगार खत्म हो चुका है। अब टैक्स बढ़ोतरी और महंगाई ने स्थिति और गंभीर बना दी है। करीब 6 से 7 करोड़ लोग इस उद्योग पर निर्भर हैं, जबकि सराफा व्यापारी लगभग 25 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी सरकार को देते हैं।
व्यापारियों का कहना है कि यदि सोने की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा और लाखों लोगों का जीवन प्रभावित होगा। उन्होंने सरकार से उद्योग को बचाने के लिए व्यावहारिक और वैज्ञानिक निर्णय लेने की मांग की।
सराफा व्यापारी अनिल पोतदार ने कहा कि आने वाले दिनों में व्यापारी अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे। वहीं, पोतदार ज्वेलर्स के संजय पोतदार ने कहा कि चांदी की कीमतों में भारी उछाल से ग्राहकों की खरीद क्षमता प्रभावित हुई है और टैक्स में राहत मिलने पर स्थिति सुधर सकती है।
दूसरी ओर, सोने के कारीगरों में बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल के मजदूरों की है। उनका कहना है कि लगातार घटते काम और महंगाई के कारण हजारों कारीगर बेरोजगारी की कगार पर पहुंच गए हैं। बेलगावी में ही लगभग 6 से 7 हजार कारीगर इस उद्योग पर निर्भर हैं। बंगाली मजदूरों ने कहा कि यदि काम नहीं मिला तो आने वाले समय में उनके सामने भूखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

