₹1,500 में छात्रों का डेटा उपलब्ध? भारत के एग्ज़ाम सिस्टम पर बड़े सवाल
CBSE OSM पोर्टल विवाद और NTA री-एग्ज़ाम पोर्टल को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर छात्रों के डेटा की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है। तकनीकी खामियां, पोर्टल फेलियर और साइबर सुरक्षा की चिंताओं के बीच अब एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है।
Careers360 के संस्थापक Maheshwer Peri के अनुसार, भारत में छात्रों की निजी जानकारी कथित तौर पर खुले बाजार में मात्र ₹1,500 जैसी कीमत पर बेची जा रही है। उनका दावा है कि ये डेटाबेस कक्षा, शहर, राज्य, शिक्षा बोर्ड और परीक्षा श्रेणी के आधार पर फ़िल्टर करके उपलब्ध कराए जाते हैं।
पेरी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि देश में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून लागू होने के बावजूद छात्रों का डेटा खुले तौर पर खरीदा और बेचा जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इतनी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं लगती।
सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, डेटा कारोबार का मामला?
हालांकि CBSE या NTA पोर्टलों से डेटा लीक होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है, लेकिन इस पूरे विवाद ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—परीक्षाओं और एडमिशन प्रक्रियाओं के दौरान जुटाए गए करोड़ों छात्रों के डेटा का आखिर होता क्या है?
हर परीक्षा आवेदन, रजिस्ट्रेशन पोर्टल और एडमिशन प्लेटफॉर्म छात्रों के नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, शैक्षणिक रिकॉर्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी का विशाल डेटाबेस तैयार करते हैं। जैसे-जैसे शिक्षा व्यवस्था डिजिटल हो रही है, वैसे-वैसे डेटा सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।
भारत क्यों है छात्रों के डेटा का सबसे बड़ा बाज़ार?
भारत में स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में 26 करोड़ से अधिक छात्र नामांकित हैं। हर साल करोड़ों विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं, प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
JEE, NEET, CUET जैसी परीक्षाओं के उम्मीदवार कोचिंग संस्थानों, विश्वविद्यालयों, एडटेक कंपनियों, शिक्षा ऋण प्रदाताओं और विदेशी शिक्षा सलाहकारों के लिए संभावित ग्राहक माने जाते हैं। ऐसे में छात्रों का डेटा एक बेहद मूल्यवान व्यावसायिक संपत्ति बन जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी संस्था को करोड़ों छात्रों में से सिर्फ 1% छात्रों का डेटा भी मिल जाए, तो उसके पास लाखों संभावित ग्राहकों तक सीधी पहुंच बन सकती है।
वैश्विक स्तर पर भी बड़ा कारोबार
छात्रों के डेटा की खरीद-फरोख्त केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका सहित कई देशों में डेटा ब्रोकर छात्रों की रुचियों, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और भविष्य की योजनाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र कर बेचते हैं।
गोपनीयता विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक डेटा ब्रोकर उद्योग अरबों डॉलर का कारोबार बन चुका है और छात्र डेटा उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कानून हैं, लेकिन चिंता भी बरकरार
भारत का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह, उपयोग और साझा करने के लिए कड़े नियम निर्धारित करता है। बिना अनुमति छात्रों का डेटा बेचना कानूनन गंभीर अपराध हो सकता है।
फिर भी सवाल बना हुआ है कि यदि छात्रों के डेटाबेस खुले बाजार में उपलब्ध होने के दावे सही हैं, तो यह जानकारी आखिर कहां से लीक हो रही है?
सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या छात्रों की निजी जानकारी अब शिक्षा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक बिकाऊ कारोबार बन चुकी है?
Source: Vartha Bharathi (Translated In Hindi)

