हिडकल जलाशय के भू-विस्थापित किसानों का आंदोलन अब तेज़ होता जा रहा है। अधिकारियों की देरी और करोड़ों रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपों के खिलाफ सैकड़ों किसान अपने मवेशियों के साथ सड़कों पर उतर आए और बड़ा धरना-प्रदर्शन किया।

बेलगावी ज़िले के हुक्केरी तालुका में हिडकल जलाशय के लिए अपनी ज़मीन देने वाले भू-विस्थापित किसानों ने अपनी जायज़ मांगों को पूरा करने की मांग करते हुए रानी चेन्नम्मा सर्कल में मवेशियों के साथ विशाल प्रदर्शन किया।

किसानों ने सिंचाई निगम (इरिगेशन कॉरपोरेशन) के मुख्य अभियंता कार्यालय के अधिकारियों पर जानबूझकर फाइलें लटकाने और करोड़ों रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए ज़ोरदार नारेबाज़ी की। कुछ देर तक सड़क जाम करने के बाद किसानों ने विशाल रैली भी निकाली।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ किसान नेता बाळेश मावनूर ने कहा कि जिला प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली कई बार अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं, लेकिन सिंचाई निगम के अधिकारी राजेश अम्मिनभावी, राठौड़, लालूर, पटेल समेत अन्य अधिकारी मंत्री को भी गुमराह कर रहे हैं और किसानों के साथ अन्याय कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण सैकड़ों एकड़ ज़मीन का मुआवज़ा अब तक अटका हुआ है।

किसानों ने साफ कहा कि उनका आंदोलन सरकार या राजस्व विभाग के खिलाफ नहीं, बल्कि सिंचाई निगम के कथित भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ है। उनका कहना है कि लगभग 90 प्रतिशत दस्तावेज़ SLO कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद अधिकारियों द्वारा गलत रिपोर्ट देकर किसानों को गुमराह किया जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो ज़रूरत पड़ी तो एक साल तक भी यहीं धरने पर बैठे रहेंगे।

इस दौरान बड़ी संख्या में किसान अपने मवेशियों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए।

वहीं, ज्ञापन स्वीकार करने के बाद जिलाधिकारी मोहम्मद रोशन ने कहा कि मामले के समाधान के लिए आज ही सिंचाई निगम के उत्तर ज़ोन के मुख्य अभियंता को अपने कार्यालय बुलाकर विशेष बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से 4 से 5 प्रमुख प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया।

जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि बैठक में अधिकारियों की रिपोर्ट और उससे जुड़े सभी दस्तावेज़ किसानों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में जांचे जाएंगे। यदि रिपोर्ट में कोई कमी पाई जाती है तो उस पर चर्चा कर सच्चाई सामने लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह अपनी ओर से भी सरकार को अलग रिपोर्ट भेजने के लिए तैयार हैं। शाम को होने वाली बैठक के बाद आगे की कार्रवाई और अंतिम फैसला लिया जाएगा।