बेलगावी में कर्नाटक राज्य संयुक्त आशा कार्यकर्ता संघ ने गुरुवार को जाति और आय प्रमाण पत्रों की घर-घर वितरण ड्यूटी से आशा वर्करों को मुक्त करने की मांग को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद संघ के प्रतिनिधियों ने ज़िलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया।

संघ ने कहा कि यदि सरकार यह जिम्मेदारी आशा वर्करों को ही सौंपना चाहती है, तो उन्हें उचित मानदेय, यात्रा भत्ता, स्मार्टफोन तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बिना किसी आर्थिक सहायता और संसाधनों के यह अतिरिक्त कार्य करना संभव नहीं है।

ज्ञापन में बताया गया कि आशा कार्यकर्ता पहले से ही गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं, नवजात शिशुओं की देखभाल, बच्चों के टीकाकरण, परिवार कल्याण कार्यक्रम, संक्रामक रोगों की रोकथाम, पोषण सेवाओं तथा घर-घर स्वास्थ्य सेवाओं जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से असंबंधित अतिरिक्त कार्य सौंपने से मूल स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

संघ ने यह भी कहा कि जाति और आय प्रमाण पत्रों के वितरण के लिए सरकार की ओर से न तो किसी मानदेय की घोषणा की गई है और न ही यात्रा भत्ता या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। जिले की कई आशा कार्यकर्ताओं के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, जबकि कई को डिजिटल प्रणाली के उपयोग में तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस कार्य को प्रभावी ढंग से पूरा करना उनके लिए संभव नहीं होगा।

संघ ने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि विभाग से बाहर का कोई भी कार्य सौंपने से पहले स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त एवं अभियान निदेशक की अनुमति लेना तथा उचित मानदेय देना अनिवार्य है। लेकिन इन नियमों का पालन किए बिना अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी कारण संघ ने स्पष्ट किया कि आशा कार्यकर्ता इस कार्य में भाग नहीं लेंगी।

प्रदर्शन में रूपा अंगडी, जयश्री माली, लक्ष्मण जडगण्णवर सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।