मजदूरों की विभिन्न जायज मांगों को लेकर CITU का राज्यव्यापी प्रदर्शन, बेळगावी में सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध

मजदूरों की विभिन्न न्यायसंगत मांगों को पूरा करने की मांग को लेकर CITU (सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस) की राज्य समिति के नेतृत्व में आज पूरे कर्नाटक में व्यापक प्रदर्शन किया गया। बेळगावी में सैकड़ों मजदूर जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने एकत्र हुए और केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना रोष व्यक्त किया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि साल 2023 से लंबित वेतन संशोधन (वेज रिवीजन) को तत्काल लागू किया जाए। उनका कहना है कि फिलहाल 2016-17 की अधिसूचना लागू है, जिसके कारण करीब 1 करोड़ 70 लाख श्रमिकों को उचित वेतन से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि वेतन संशोधन को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू किया जाए।

CITU नेताओं ने कहा कि अकुशल (Unskilled) और अर्धकुशल (Semi-skilled) श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 36 हजार रुपये प्रतिमाह तय किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी वैज्ञानिक आधार पर न्यूनतम वेतन निर्धारण की बात कह चुका है, इसलिए राज्य सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 9 मई से ऐसे श्रम कानून लागू किए हैं जो मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाले हैं। CITU ने इन नीतियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि निजी उद्योगों और सरकारी विभागों में ठेका आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए विशेष कानून बनाया जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान श्रमिक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सरकार को इसके विरोध का सामना करना पड़ेगा।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में CITU पदाधिकारी, कार्यकर्ता और श्रमिक मौजूद रहे।