दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद इज़रायल और ईरान ने एक-दूसरे के क्षेत्रों पर सीधे हमले किए हैं. बेरूत पर इज़रायली हमले के बाद ईरान ने मिसाइलें दागीं, वहीं इज़रायल ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया.
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में दो महीने पहले लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार इज़रायल और ईरान ने एक-दूसरे की सीमा के भीतर सीधे सैन्य हमले किए हैं. इज़रायली हवाई हमलों और उसके जवाब में ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है. हालात ऐसे हैं कि युद्धविराम लगभग निष्प्रभावी दिखाई दे रहा है और क्षेत्र एक नए सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है.
अल जज़ीरा के अनुसार, इज़रायली सेना ने सोमवार को कहा कि ईरान ने उसके क्षेत्र की ओर मिसाइलों की दूसरी खेप दागी है. इसके बाद देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए और वायु रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया गया. वहीं, ईरान के विभिन्न शहरों में भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. तेहरान, तबरीज़ और इस्फहान में विस्फोटों की सूचना मिली है, जबकि बाद में करज और दक्षिण-पश्चिमी ईरान के माहशहर शहर में भी हमलों की रिपोर्ट आई.
तनाव में यह नया उछाल रविवार को तब आया जब इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगर दाहियेह पर हमला किया. इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई और 20 अन्य घायल हो गए. अल जज़ीरा के मुताबिक, इसके जवाब में ईरान ने उत्तरी इज़रायल की ओर मिसाइलें दागीं और आरोप लगाया कि इज़रायल लगातार युद्धविराम समझौतों का उल्लंघन कर रहा है.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स ने इज़रायल के नेवातिम और तेल नोफ वायुसेना अड्डों को निशाना बनाया. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आईआरजीसी का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान के भीतर स्थित कई रडार प्रतिष्ठानों पर हुए इज़रायली हमलों के जवाब में की गई. गार्ड्स ने यह भी कहा कि वे ‘हर परिस्थिति’ के लिए तैयार हैं और आवश्यकता पड़ने पर व्यापक सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं.
इस बीच इज़रायल ने भी ईरान के औद्योगिक और सामरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना जारी रखा है. इंडियन एक्सप्रेस और ईरानी समाचार एजेंसियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, खुझेस्तान प्रांत के माहशहर शहर स्थित करून पेट्रोकेमिकल कंपनी पर इज़रायली हमला हुआ है. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है. माहशहर पेट्रोकेमिकल विशेष आर्थिक क्षेत्र के प्रशासन ने पुष्टि की है कि सुरक्षा कारणों से कर्मचारियों को परिसर से बाहर निकाल लिया गया है.
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इज़रायल पर किया गया हमला एक ‘चेतावनी’ था. उनका संकेत है कि फिलहाल प्रतिक्रिया को नियंत्रित दायरे में रखा गया है, लेकिन यदि इज़रायल लेबनान, विशेषकर बेरूत के दाहियेह इलाके पर हमले जारी रखता है, तो ईरान आगे भी जवाबी कार्रवाई करेगा. ईरानी अधिकारियों ने यह चेतावनी भी दी है कि किसी बड़े इज़रायली हमले की स्थिति में प्रतिक्रिया ‘कड़ी और पछतावा पैदा करने वाली’ होगी.
उधर अमेरिका दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह देता दिखाई दे रहा है, हालांकि उसके प्रभाव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि ईरान की मिसाइल कार्रवाई से संघर्ष समाप्त करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचेगा और तेहरान को बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘यह निश्चित रूप से मदद नहीं करेगा. उन्हें वापस आकर समझौता करना होगा.’
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि इज़रायल को अंततः वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाले किसी संभावित समझौते को स्वीकार करना पड़ सकता है. फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘सभी फैसले मैं ले रहा हूं,’ जबकि एक्सियोस से उन्होंने कहा कि वह इज़रायल को जवाबी कार्रवाई से बचने की सलाह देंगे.
हालांकि अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने स्थिति को अलग नजरिए से देखा है. उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि इज़रायल ने ईरान पर हमला करके ट्रंप की सार्वजनिक अपील की अवहेलना की है और इससे अमेरिकी प्रभाव कमजोर होता दिख रहा है.
इस बीच क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं. अल जज़ीरा के अनुसार, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल थानी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की. दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयासों तथा लेबनान की स्थिति पर चर्चा की. कतर ने कहा है कि वह तनाव कम करने, क्षेत्रीय स्थिरता कायम रखने और दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करने वाले सभी प्रयासों का समर्थन करता है.
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यह है कि दो महीने पहले लागू हुआ युद्धविराम तेजी से कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है. क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधियों, परस्पर चेतावनियों और बढ़ती बयानबाजी के बीच यह आशंका गहराती जा रही है कि पश्चिम एशिया एक बार फिर व्यापक सैन्य टकराव की ओर बढ़ सकता है.
Source: The Wire

