हैं कुछ लोग जो उसे जगा रहे हैं। चाहे वे खुद सोए हुए हों पर उन्होंने हिन्दू को जाग्रत करने का मतलब जगाने का बीड़ा उठाया हुआ है।

हिन्दू जाग्रत हो रहा है। मतलब हो नहीं रहा है, उसे जाग्रत किया जा रहा है। वह अभी दस ग्यारह साल पहले तक सो रहा था। अब उसे जगाया जा रहा है। जब उसे जाग्रत किया जा रहा है तो प्रश्न उठता है कि उसे जाग्रत कौन कर रहा है।

हाँ भाई, हैं कुछ लोग जो उसे जगा रहे हैं। चाहे वे खुद सोए हुए हों पर उन्होंने हिन्दू को जाग्रत करने का मतलब जगाने का बीड़ा उठाया हुआ है।

वे हर समय हिन्दू को जाग्रत करते रहते हैं। खाते पीते, सोते जागते, हर समय हिन्दू को जगाते रहते हैं। यहाँ तक कि वे हगते मूतते, सॉरी लघुशंका दीर्घशंका करते भी हिन्दू को जाग्रत करते रहते हैं। हिन्दू को वे तबतक जाग्रत करते रहेंगे जबतक वह पूरी तरह नहीं जाग जायेगा।

हिन्दू अब जाग्रत हो गया है और जाग्रत हो हिन्दू सिर्फ आत्मा बन रह रह गया है। पहले हिन्दुओं का एक शरीर होता था और उसमें उसकी आत्मा रहती थी। अब सिर्फ और सिर्फ आत्मा रहती है, शरीर गायब हो गया है। और आत्मा के लक्षण तो भगवान श्रीकृष्ण गीता में बता ही चुके हैं। इसलिए इस जाग्रत हुए हिन्दू को न तो अब भूख सताती है और न ही उसे स्वच्छ हवा और पानी की जरूरत होती है। नौकरी भी अब उसकी जरूरत नहीं रह गई है। महंगाई भी उसको अब परेशान नहीं करती है। कपड़ों की जरूरत भी तो शरीर को ही पड़ती है, इसलिए कपड़ों पर बढ़ता जीएसटी भी उसे मंजूर है। वह जानता है, शिक्षा नकारा बनती है इसलिए बंद होते स्कूलों से भी उसे समस्या नहीं है।

आत्मा इधर से उधर ऐसे ही विचरण कर सकती है। पल भर में यहाँ से वहाँ जा सकती है। इसलिए उसको वाहन की जरूरत नहीं पड़ती है। खाना भी उसको खाना नहीं पड़ता है। इस लिए पेट्रोल की, डीज़ल की, रसोई गैस की कीमत कितनी भी बढ़े, उस जाग्रत हिन्दू को बाल बराबर फर्क नहीं पड़ता है।

तो आप कहेंगे कि ये हिन्दू जाग्रत हो कर क्या कर रहा है। दिन भर खाली बैठा रहता है। ना नौकरी, ना छोकरी। ना खाने को ना पीने को। ना पढ़ाई, ना लिखाई। सॉरी, सॉरी, खाने को तो सरकार जी की फोटो लगे थैली में पांच सेर अनाज मिल ही जाता है। पढ़ने को व्हाट्सप्प है और लिखने के लिए तो नया इतिहास है ही। तो हिन्दू जाग कर यही कर रहा है।

लेकिन इतने भर से काम नहीं बन जाता है। आखिर हिन्दू दस साल से अधिक से अनवरत जाग रहा है। मतलब उसको जगाए रखा जा रहा है। उसको जागते हुए कुम्भकर्ण से भी अधिक समय हो गया है। ज्ञात किस्से कहानियों में भी कुम्भकर्ण से ज्यादा लगातार जागने वाला कोई और मेरी जानकारी में तो नहीं है। कुम्भकर्ण भी इस बीच में दस ग्यारह बार सो गया होता।  हाँ, कभी एक लड़की के बारे में खबर पढ़ी थी। जो कभी सोती नहीं थी। पर उसे तो बीमारी थी।

हमें हिन्दुओं को भी बीमार ही करना है। उसे सोचने के नाकाबिल बनाना है। उसे बस कुछ झुनझुना पकड़ाना है और उसमें उलझाना है। कभी बाबर में उलझाना है तो कभी औरंगजेब में। और नेहरू, उसमें तो हमेशा ही उलझाए रखना है।

तो हिन्दू भाइयों और बहनों, हम बहुत लम्बा जाग लिए। बहुत बीमार हो लिए। हमें लगातार जगाये रखने वाले तो बीमार हैं ही, उन्होंने हमें भी बीमार कर दिया है। कहाँ तो दो तीन दिन लगातार जाग लो तो दिमाग़ सुन्न होने लगता है, कहाँ हम दस ग्यारह साल से लगातार जाग रहे हैं। दिमाग़ का तो कचूमर ही निकल गया है।

तो भाइयों, थोड़ा सो लो। दिमाग़ को रिफ्रेश करो। एक शॉर्ट स्लीप ले लो। नागरिक बनो और फिर पूछो। मेरी नौकरी का क्या हुआ? बच्चे की शिक्षा का क्या हुआ? महंगाई इतनी क्यों बढ़ रही है? आय बढ़नी बंद क्यों हो गई है? ग़रीबी इतनी क्यों है? सरकारी स्कूल क्यों बंद हो रहे हैं? इलाज इतना महंगा क्यों हो रहा है? सरकार से पूछो, सरकार जी से पूछो।

प्रश्न तो बहुत हैं। पर अगर हम सचमुच जाग जाएं तो!

 

Source: News Click