नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर चीन ने उन भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया है, जिनमें आपदा के लिए चीन की जलविद्युत परियोजनाओं को ज़िम्मेदार ठहराया गया था. बीजिंग ने कहा कि बाढ़ ग्लेशियर ढहने से आई और चीन ‘बिना तथ्य की दुर्भावनापूर्ण अटकलों’ को ख़ारिज करता है.

 

नई दिल्ली: नेपाल-चीन सीमा के पास आई भीषण बाढ़ के लिए चीन और उसकी जलविद्युत परियोजनाओं को जिम्मेदार ठहराने वाली भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स को बीजिंग ने खारिज कर दिया है.

इस संबंध में चीन ने कहा है कि यह आपदा नेपाल में एक ऊंचाई वाले ग्लेशियर के ढहने के कारण आई और ऐसी ‘बिना तथ्य की दुर्भावनापूर्ण अटकलों’ को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

उल्लेखनीय है कि सोमवार (31 अगस्त) को चीन के विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में ब्लूमबर्ग के एक पत्रकार ने प्रवक्ता गुओ जियाकुन से भारतीय टीवी चैनलों की उन रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया मांगी थी, जिनमें बाढ़ के लिए चीन की जलविद्युत और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को जिम्मेदार बताया गया था.

गुओ ने कहा कि चीन और नेपाल के विशेषज्ञों तथा संबंधित सरकारी संस्थानों ने जांच के बाद पाया है कि पिछले सप्ताह नेपाल में एक ऊंचाई वाले ग्लेशियर के ढहने से यह बाढ़ आई.

उन्होंने आगे कहा, ‘इतनी बड़ी त्रासदी के सामने हम बिना तथ्य की दुर्भावनापूर्ण अटकलों को खारिज करते हैं.’

चीन पर बाढ़ में मारे गए और लापता लोगों की संख्या कम बताने के आरोपों पर भी गुओ ने सफाई दी. उन्होंने कहा कि चीन ने राहत और बचाव अभियान के दौरान जानकारी पारदर्शी और समय पर जारी की है. उन्होंने आपदा के समय चीन को बदनाम करने और गलत सूचना फैलाने को अनुचित बताया.

मालूम हो कि नेपाल और चीन की सीमा से लगे इलाकों में बुधवार (26 अगस्त) को आई अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है. सोमवार रात तक नेपाल और चीन में इस आपदा से 950 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 4,400 से अधिक लोग लापता थे.

गौरतलब है कि भारत के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बताया था कि आपदा के बाद 275 भारतीय नागरिक लापता हैं.

वहीं, सोमवार रात मंत्रालय ने कहा कि अब तक 158 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है.

इस बीच, राहत और बचाव दल सोमवार को उन सैकड़ों मजदूरों को निकालने में जुटे रहे, जिनके जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है. करीब 500 मजदूरों के सुरंगों में फंसे होने की बात कही गई है.

मालूम हो कि नेपाल में बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नदी के किनारे कई गांव मोटी मिट्टी और मलबे की चपेट में आ गए. कई जगह घर, वाहन और ट्रैक्टर मलबे में दबे दिखाई दिए. भूस्खलन के कारण नदी किनारे बने धान के खेतों के कुछ हिस्से भी नदी में बह गए हैं. इसके साथ ही बाढ़ के बाद तिब्बत में एक झील बन गई है. चीन को आशंका है कि अगर यह झील अचानक टूटती है तो दोबारा बड़ी बाढ़ आ सकती है.

Source: The Wire