कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा पर उनसे मदद मांगने आई एक 17 वर्षीय लड़की के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है. मामले पर बेंगलुरू की एक फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो रही है, जिसने येदियुरप्पा को 15 जुलाई को पेश होने कहा है.

 

नई दिल्ली: बेंगलुरु की एक फास्ट-ट्रैक अदालत ने गुरुवार (4 जुलाई) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को उनके खिलाफ दर्ज पॉक्सो के एक मामले में समन जारी किया है. ये समन येदियुरप्पा को 15 जुलाई को अदालत में पेश होने के लिए जारी किया गया है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने हाल ही में इस मामले को लेकर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भाजपा नेता के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसके बाद अदालत ने आरोपपत्र के आधार पर येदियुरप्पा के खिलाफ आरोप तय करने के उद्देश्य से उन्हें तलब किया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 27 जून को दायर सीआईडी के आरोपपत्र में येदियुरप्पा पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धारा 8 (यौन उत्पीड़न के लिए सजा) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354ए (यौन उत्पीड़न), 204 (साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करने से रोकने के लिए दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को नष्ट करना) और 214 (अपराधी को बचाने के बदले में उपहार या संपत्ति की बहाली की पेशकश) के तहत आरोप लगाए गए हैं.

मालूम हो कि येदियुरप्पा पर इस साल फरवरी में एक 17 वर्षीय किशोरी से छेड़छाड़ करने का आरोप है, जब पीड़िता अपनी मां के साथ अपने खिलाफ यौन उत्पीड़न के एक पुराने मामले में मदद मांगने के लिए येदियुरप्पा के घर गई थी.

14 मार्च को लड़की की मां ने पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में कहा था कि वह और उसकी बेटी 2 फरवरी को यौन शोषण के पिछले मामलों में सहायता मांगने के लिए येदियुरप्पा से मिलने गई थीं. वह चाहती थीं कि वे जांच को विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपने में मदद करें.

उन्होंने आरोप लगाया था, ‘हम अपनी बेटी, जो बलात्कार की शिकार है, को न्याय दिलाने में मदद मांगने के लिए येदियुरप्पा के घर गए थे. उन्होंने कुछ मिनट तक हमारी बातें सुनीं और फिर मेरी बेटी को एक कमरे में ले गए और उसके साथ छेड़छाड़ की.’ उन्होंने यह भी कहा था कि वह डर के कारण पुलिस से संपर्क करने में देरी कर रही थी.

अपने आरोपपत्र में सीआईडी ​​ने पूर्व मुख्यमंत्री और तीन अन्य लोगों पर पीड़िता और उसकी मां को चुप रहने के लिए रिश्वत देने का भी आरोप लगाया है. हालांकि, येदियुरप्पा इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.

गौरतलब है कि मार्च में इस मामले को लेकर कर्नाटक पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी और उसके तुरंत ये बाद मामला सीआईडी ​​को सौंप दिया गया था.

इससे पहले फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने 13 जून को येदियुरप्पा के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, लेकिन अगले दिन ही कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सीआईडी ​​को येदियुरप्पा को हिरासत में लेने या गिरफ्तार करने पर रोक लगा दी थी.

अदालत ने उन्हें 17 जून को पूछताछ के लिए सीआईडी ​​के सामने पेश होने का निर्देश दिया था. वह कथित तौर पर तीन घंटे से अधिक समय तक सीआईडी ​​कार्यालय में थे.

जून महीने के अंत में, उच्च न्यायालय ने उन्हें दी गई अंतरिम सुरक्षा दो सप्ताह के लिए बढ़ा दी थी, जो इस महीने 12 जुलाई को समाप्त हो जाएगी.

उल्लेखनीय है कि इस मामले में 26 मई को शिकायकर्ता लड़की की मां की ‘फेफड़ों के कैंसरी’ के कारण बेंगलुरु के एक अस्पताल में मृत्यु हो गई थी.

गौरतलब है कि येदियुरप्पा चार बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और लिंगायत समुदाय के एक प्रमुख नेता माने जाते हैं. द न्यूज़ मिनट के अनुसार, पीड़िता की मां भी इसी समुदाय से थीं, इसलिए उन्होंने येदियुरप्पा से मदद के लिए संपर्क किया था.

 

Source: The Wire