अंजुमन की तरफ़ से संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वज़ूख़ाने को सील किया गया है। मछली के दाना-पानी और सफाई की व्यवस्था हमारी तरफ से की जाती रही है, लेकिन सील होने के बाद हम यह काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण मछलियों की मौत हो रही है।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर वजूखाने में मछलियों के मरने का मामला सामने आया है जिससे दुर्गंध आ रही है। श्रृंगार गौरी और अन्य देवी देवताओं के दर्शन-पूजन का अधिकार मांगने वाली महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि 16 मई 2022 के बाद से वजूखाने का पानी साफ नहीं हुआ है। 20 दिसंबर 2023 से 25 दिसंबर 2023 के बीच कुंड में मौजूद ज्यादातर मछलियां मर गई हैं, जिससे वहां बहुत दुर्गंध है। मरी हुई मछलियां उस स्थान पर सड़ रही हैं जहां विवादित आकृति है जिसे हिंदू समुदाय के लोग उसे शिवलिंग मान रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यहां चल रहे विवाद के बीच पूरे वजूखाने को सील किया गया है।

ज्ञानवापी में श्रृंगार गौरी और अन्य देवी देवताओं की पूजा-अर्चना का अधिकार मांगने वाली चार महिलाओं ने अपने अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि ज्ञानवापी परिसर में एडवोकेट कमिश्नर द्वारा किए गए सर्वे के दौरान वजू क्षेत्र में मंदिर पक्ष ने शिवलिंग मिलने का दावा किया था, हालांकि मस्जिद पक्ष उसे फव्वारा बताता है, कोर्ट के आदेश के बाद 16 मई 2022 से वह पूरा क्षेत्र सील है। यह भी कहा गया है कि कोर्ट एक उचित आदेश पारित करे ताकि दोनों पक्षों के बीच शांति बनी रहे।

पहले वाराणसी के सिविल जज ने क्षेत्र को सील करने का आदेश दिया था। बाद में 20 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक संशोधन के साथ विवादित क्षेत्र को पूरी तरह सील रखने का आदेश दिया था। उसी समय से विवादित परिक्षेत्र सील है। मंदिर पक्ष की ओर से यह अर्जी पहले से लंबित अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की विशेष अनुमति याचिका के मामले में दाखिल की गई है। हिंदू पक्ष की याचिका में कहा गया है कि बनारस के सिविल जज ने एडवोकेट कमिश्नर से सर्वे कराने का आदेश दिया था। सर्वे के दौरान एक कुंड में आकृति मिली थी। उसी कुंड में मुस्लिम समुदाय के लोग वजू करते थे। वह जल कुंड और उसके आसपास का क्षेत्र कोर्ट के आदेश से 16 मई 2022 से सील है।

मछलियों के मरने से सड़ांध

याचिका में कहा है कि 17 मई 2022 को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट ने वाराणसी के सिविल जज की अदालत में एक अर्जी दाखिल की थी, जिसमें कुंड में मौजूद मछलियों को स्थानांतरित करने के बारे में गाइडलाइन मांगी गई थी। उस समय भी कुछ मछलियों की मौत हुई थी। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने कोर्ट में उस अर्जी का विरोध किया जिसमें हिंदू पक्ष की महिलाओं ने कहा है कि कुंड का पानी 16 मई 2022 से साफ नहीं हुआ है। उस कुंड में मौजूद मछलियां 20 दिसंबर 2023 से 25 दिसंबर 2023 के बीच मर गई हैं जिससे वहां वजूखाने में बहुत दुर्गंध है।

याचिका में कहा गया है कि मछलियों की मौत के लिए अंजुमन इंतजामिया कमेटी जिम्मेदार है, क्योंकि अगर जिला मजिस्ट्रेट के अनुरोध के मुताबिक मछलियां स्थानांतरित कर दी गई होती तो यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति नहीं आती। हिंदू पक्ष की महिलाओं का कहना है कि जिस आकृति को लेकर विवाद है वह पवित्र शिवलिंग है। उस स्थान को किसी तरह की गंदगी, दुर्गंध या मरे जानवरों से दूर रखा जाना चाहिए। विवादित आकृति मरी हुई मछलियों के बीच है जिससे शिव भक्तों की भावना आहत हो रही है।

याचिका में मांग की गई है कि बनारस के डीएम कुंड में मरी मछलियों को निकालवाएं और पूरे क्षेत्र को साफ सुथरा कराएं। साथ ही वहां स्वच्छता बनाए रखने का आदेश दिया जाए। याचियों के अधिवक्ता वकील विष्णु शंकर जैन के मुताबिक, मछलियों के मरने के बाद वहां उठने वाली दुर्गंध से स्थिति बेहद गंभीर है। उम्मीद है कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मेंशन किया जाएगा, ताकि वहां जल्द से जल्द सफाई हो।

मुफ्ती-ए-शहर भी चिंतित

पिछले साल मुफ्ती ए शहर और अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद के सचिव अब्दुल बातिन नोमानी ने बनारस के डीएम को पत्र लिखा था कि वजूखाना सील होने के कारण उसकी साफ सफाई और पानी निकासी नहीं हो पा रही है। इसके चलते अधिकांश मछलियां मर गई है। इसके कारण इसकी दुर्गंध दूर तक पहुंच रही है और बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है और लोगों के इसके चपेट में आने का भी डर है। पत्र में यह भी कहा गया था कि मछलियों के मरने से उठने वाली दुर्गंध के चलते मस्जिद में आने वाले नमाजी और विश्वनाथ मंदिर के दर्शनार्थियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अंजुमन की तरफ से संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वजू खाने को सील किया गया है। उनके दाना-पानी और सफाई की व्यवस्था हमारी तरफ से की जाती रही है, लेकिन सील होने के बाद हम यह कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इसके कारण मछलियों की मृत्यु हो रही है। प्रशासनिक अधिकारियों को उसके अंदर मछलियां होने की जानकारी दी गई थी। पूर्व में एक महीने में वजूखाने का पूरा पानी निकाल कर उसकी सफाई की जाती थी वजूखाना सील होने के बाद मछलियों को चारा तो दे दिया जाता है, लेकिन पानी की साफ सफाई पिछले डेढ़ साल से नहीं हो रही है। इसके कारण गंदा पानी होने और ऑक्सीजन की कमी की वजह से मछलियां मर रही हैं। जो मछलियां मरी हैं उनका वजन दो से ढाई किलो है। हमने जिलाधिकारी को अपनी समस्या से अवगत करा दिया है। विवादित स्थल कोर्ट के आदेश पर सील है। देखना है कि कोर्ट क्या आदेश निर्गत करता है।

दूसरी ओर, ज्ञानवापी मामले में पहले से ही मस्जिद पक्ष की तीन याचिकाएं लंबित हैं जिनमें एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने, शिवलिंग के वैज्ञानिक परीक्षण कराने और मंदिर पक्ष के पूरे आधार को चुनौती दी गई है। उधर, बनारस के जिला जज की अदालत में बुधवार को उस मामले की सुनवाई की जाएगी जिसमें मुस्लिम ने कोर्ट से आग्रह किया है कि एएसआई सर्वे की स्टडी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाए। 18 दिसंबर 2023 को एएसआई ने कोर्ट के समक्ष अपनी स्टडी रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में सौंपी थी। वजुखाने को छोड़कर एएसआई ने ज्ञानवापी परिसर का करीब सौ दिनों तक सर्वे किया था।

Source: News Click