दलितों को RSS का मुद्दा क्यों मंज़ूर नहीं?

दलितों को RSS का मुद्दा क्यों नहीं होना चाहिए? RSS के पंजीकरण और उसके चंदों के हिसाब-किताब को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक…

क्या हिंदुत्व द्वारा दहशतगर्दी फैलाने का कोई प्रोजेक्ट देश में मौजूद है?

21वीं सदी के पहले दशक में कई ऐसे आतंकी हमले हुए जिनमें मुस्लिम धार्मिक या सांस्कृतिक सभाओं या आम नागरिकों को निशाना बनाकर धमाके किए गए. पुलिस ने शुरू में…

हिंदुस्तानी मुसलमान: आबादी के हिसाब से बराबर हिस्सेदारी का अधूरा सफर

हिंदुस्तान में मुसलमान: आबादी, नुमाइंदगी और बराबर की हिस्सेदारी का सवाल हिंदुस्तान की सबसे बड़ी ताकत उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब, विविधता और बहुलतावादी पहचान है। अलग-अलग मज़ाहिब, ज़बानों, संस्कृतियों और तहज़ीबी…

आरएसएस: राष्ट्रभक्ति के नकाब के पीछे जवाबदेही का सवाल

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरएसएस को लेकर जो सवाल उठाए हैं, वे सिर्फ़ किसी संगठन की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं। यह बहस भारत के लोकतंत्र, संविधान,…

भारतीयों के जीवन पर चुप्पी: एक राष्ट्रीय शर्म

ओमान तट पर अमेरिकी हमला और भारत का कूटनीतिक आत्मसमर्पण। क्या भारत की रणनीतिक स्वायत्तता एक छलावा मात्र है? ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी केंद्रीय कमान (US…

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीयों की मौत पर मोदी सरकार की प्रतिक्रिया क्या बताती है?

अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत सरकार की प्रतिक्रिया ने संप्रभुता, नागरिकों की सुरक्षा, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और विदेश नीति की स्वतंत्रता को लेकर…

मोबाइल में बैठा मुजरिम: डिजिटल दुनिया के छुपे हुए लुटेरे

एक दौर था जब चोर रात के अंधेरे में दीवार फांदकर घर में दाखिल होता था। आज का चोर न दरवाज़ा खटखटाता है, न दीवार फांदता है और न ही…

गौरी लंकेश की हत्या के लगभग नौ साल बाद केस की सुनवाई सातवें जज के पास पहुंची

पत्रकार गौरी लंकेश की 5 सितंबर, 2017 को बेंगलुरु स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसे लेकर दक्षिणपंथी हिंदुत्व समूहों के लोगों के ख़िलाफ़…

INDIA Bloc का नया अज़्म, हुकूमत से सख़्त जवाबतलबी की तैयारी

मुल्क की मौजूदा सियासी सूरत-ए-हाल को देखते हुए ऐसा महसूस होता है कि ऑपोज़िशन अब तक मुत्तहिद होकर बरसर-ए-इक़्तेदार NDA हुकूमत को मज़बूती से घेरने में पूरी तरह कामयाब नहीं…

संविधान और संस्थाओं पर बहस तेज, क्या सुरक्षित है भारतीय लोकतंत्र का भविष्य?

आइन, इदारे और जम्हूरियत: क्या हिंदुस्तान एक नाज़ुक दोराहे पर खड़ा है?   हिंदुस्तान की सियासी फिज़ा में इस वक्त गैरमामूली बेचैनी महसूस की जा रही है। एक तरफ लोकसभा…

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